खरसावां में पारंपरिक ढंग से मना आदिवासी
दिवस, पदयात्रा निकाल कर शहीदों को दी श्रद्वाजलि
आदिवासी भाषा-संस्कृति की रक्षा का लिया संक्लप
kharsawan
अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी दिवस के अवसर पर आदिवासी युवा समन्वय समिति सरायकेला खरसावां के द्वारा खरसावां सामुदायिक भवन में पारंपरिक ढंग से अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी दिवस मनाया गया। हो, संथाल, मुंडा, उरावं, भुमिज, माहली, बिरहोर, खडिया आदि आदिवासी समाज के लोगों ने खरसावां के वीर शहीदों को श्रद्वाजंलि देकर अपने अधिकारों को लेकर आवाज बुलंद किया।

समाज के लोगो ने एक तीर एक कमान, सारे आदिवासी एक समान के तर्ज पर अधिकारों की आवाज को बुलद करते हुए खरसावां सामुदायिक भवन से पारंपरिक पदयात्रा निकाली। सबसे पहले खरसावां शहीद वेदी पहुचकर पूजा-अर्चना किया और शहीदो को श्रद्वाजंलि दी। इसके बाद खरसावां चांदनी चौक पहुचकर केरसे मुंडा चौक पहुच कर श्रद्वाजंलि दी। इस दौरान अपनी भाषा-संस्कृति की रक्षा करने का संक्लप लिया। इसके बाद वारांग क्षिति लिपि का बोर्ड लगाया गया। वही झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री सह राज्यसभा सांसद दिशुम गुरु शिबू सोरेन के चित्र पर पुष्प अर्पित किया। इसके बाद दो मिनट का मौन रखकर उनके आत्मा शांति के लिए प्रार्थना की गई। इसके अलावे देर शाम तक सांस्कृतिक कार्यक्रम चलता रहा। इसके अलावे क्षेत्रिय भाषाओं में मैट्रिक व इंटर में बेहतर प्रदर्शन करने छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया।

संघर्ष ही आदिवासी का जीवन दर्शन है-बांसती
खरसावां के अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी दिवस कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपस्थित समाजसेवी बांसती गागराई ने कहा कि संघर्ष ही आदिवासी का जीवन दर्शन है। जन्म से मृत्यु तक संघर्ष करना हम आदिवासियों की नियती बन गई है। आइए अपने हक अधिकारों के लिए एकजूट होकर संघर्ष करे। उन्होने कहा कि हम लोगों को जागरूक होने के लिए सबसे पहले शिक्षा ग्रहण करना पड़ेगा। सभी अच्छी शिक्षा प्राप्त करे। अभिभावक अपने अपने बच्चों को भी शिक्षा दे ताकि आगे जाकर आदिवासी समाज का बच्चा देश में समाज एवं परिवार का नाम रौशन करेगा।
ये थै मौजूद
समाजसेवी बांसती गागराई, डेविड उराव, राजेश उरावं, सुखराम सोय, मान सिंह बानरा, मनोज सोय, बिशु रघु, बिरसा माहली, सोयना सरदार, गोविंद हेम्ब्रम, नरेश सिजुई, अजय सामड, रामलाल हेम्ब्रम, मदन लकडा, तुराम बोरपाई, लाल सिंह हेम्ब्रम, मनोज हेम्ब्रम, सालन सोय, सिद्वेश्वर कुदादा, रवि बाकिरा आदि मौजूद थे।
