कुचाई में कोपलोग में “मेरा रेशम, मेरा अभिमान“ के तहत
चला जागरूकता कार्यक्रम, किसानों का सामाजिक-आर्थिक विकास
कर भारत को रेशम के क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी बनाना उदेश्य,
kharsawan
कुचाई प्रखंड के कोपलोग में गुरूवार को केंद्रीय रेशम बोर्ड एवं अग्र परियोजना खरसावां के संयुक्त तत्वावधान में “मेरा रेशम, मेरा अभिमान“ के तहत जागरूकता कार्यक्रम चलाया गया। इस कार्यक्रम में मरांगहातु, भूरकूंडा, कोपलोग, गाडाकुटी गांव से 55 किसानों को रेशम कीटपालन की नवीनतम तकनीक से अवगत कराया गया। नये अविष्कार की जानकारी दी। इस अभियान में गांव-गांव जाकर किसानों को जोड़ा जा रहा है।

केंद्रीय रेशम बोर्ड नगरी के वैज्ञानिक डॉ. अपूर्णा कोप्पारपुर ने कहा कि रेशम उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाना तथा रेशम उत्पादन करने वाले किसानों का सामाजिक-आर्थिक विकास करना तथा भारत को रेशम के क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी बनाना उदेश्य है। उन्होने किसानों को शहतूत और रेशम कीटपालन की उपज बढ़ाने के तरीके बताए। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम पूरे जिले में चलाया जा रहा है। इसके माध्यम से किसानों को प्रशिक्षित करके उन्हें विभागीय योजनाओं से जोड़ा जाएगा। उन्होंने किसानों को कीट की परिपक्व अवस्था की पहचान कराई और समझाया कि रेशम कीटपालन के प्रत्येक चरण में कीटों को संक्रमण से कैसे बचाया जाए। इसमें ऊष्मायन, चाकी और वयस्क अवस्था से लेकर कोया की तुड़ाई तक की प्रक्रिया शामिल है। रेशम कीटपालन के प्रत्येक चरण में सावधानीपूर्वक कार्य करने की आवश्यकता है।

उन्होंने जागरूकता में किसानों को रेशम कीटपालन से लेकर कोया की कटाई तक की जानकारी दी। साथ ही संक्रमण नियंत्रण, साफ-सफाई और अन्य रोग प्रतिरोधक उपायों के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि रोग मुक्त वातावरण से कोया की गुणवत्ता बेहतर बनाई जा सकती है। वही खरसावां के अग्र परियोजना पदाधिकारी नितिश कुमार ने कहा कि मेरा रेशम, मेरा अभिमान अभियान देशभर के 100 जिलों में चलाया जा रहा है। इसमें झारखंड के पांच जिले शामिल हैं। जिसमें झारखंड के सरायकेला खरसावां, पश्चिमी सिंहभूम, गोडडा, देवघर, गिरिडीह जिला शामिल है। इस दौरान मुख्य रूप से केंद्रीय रेशम बोर्ड नगरी के वैज्ञानिक डॉ. अपूर्णा कोप्पारपुर, खरसावां के अग्र परियोजना पदाधिकारी नितिश कुमार सहित काफी संख्या में किसान व ग्रामीण उपस्थित थे।
