खरसावां पॉलिटेक्निक छात्रों की डीसी से शिकायत पर
सीओ ने जांचकर सौपी रिपोर्ट, फीस वसूली, सहित कई गंभीर आरोप,
जांच में अब तक 32 छात्रों को किया छात्रावास से निष्कासित,
kharsawan खरसावां के आमदा में संचालित राजकीय पॉलिटेक्निक के छात्रों द्वारा संस्थान के प्रभारी प्राचार्य डॉ. जयेश कुमार पर लगाए गए गंभीर आरोपों को लेकर सरायकेला-खरसावां जिला उपायुक्त नितिश कुमार सिंह ने जांच का आदेश दिया था। उपायुक्त के निर्देश पर खरसावां अंचल अधिकारी कप्तान सिंकू ने विगत 7 जुलाई 2025 को संस्थान का दौरा कर छात्रों से मिलकर पूरे मामले की जांच की। तत्पश्चात उन्होंने जांच प्रतिवेदन उपयुक्त को सौंपा है।

जांच में रिपोर्ट में पाया गया कि अब तक 32 छात्रों को राजकीय पॉलिटेक्निक के छात्रावास से निष्कासित किया गया। राजकीय पॉलिटेक्निक के छात्रों ने संस्थान के प्रभारी प्राचार्य डॉ. जयेश कुमार पर लगाए गए आरोप में पॉलिटेक्निक के द्वितीय व तृतीय वर्ष के छात्रों ने एक संयुक्त शिकायत पत्र के माध्यम से कहा था कि छात्रावास की खराब व्यवस्था के नाम पर सभी छात्रों को जबरन हॉस्टल से बाहर कर दिया गया। गरीब छात्र आसपास रूम लेकर रहने को मजबूर हैं, जिससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ा है। इंटरनल परीक्षा के नाम पर जबरन असाइनमेंट व टेस्ट कॉपी खरीदी जाती है। सेमेस्टर परीक्षा का परिणाम देर से जारी किया जाता है या संस्थान में आने के बाद बताया जाता है, जिससे विद्यार्थियों के भविष्य पर संकट उत्पन्न होता है। कंप्यूटर इंजीनियरिंग जैसे कोर्स में शिक्षक की अनुपलब्धता और ऑनलाइन कोर्स खरीदने की मजबूरी है। छात्रों से संवाद नहीं किया जाता, और समस्याएं उठाने पर उन्हें डराया जाता है। इसके अलावे कई आरोप लगाया गया है।
सीओ की जांच रिपोर्ट में कई बिंदुओं की पुष्टि
खरसावां अंचल अधिकारी कप्तान सिंकू द्वारा प्रस्तुत जांच रिपोर्ट में पाया गया कि 32 छात्रों को छात्रावास से निष्कासित किया गया। जिसमें महिला छात्राएं भी शामिल थीं। परीक्षा से संबंधित असाइनमेंट और टेस्ट कॉपी छात्रों को खुद से खरीदनी पड़ी। सेमेस्टर परिणामों की जानकारी समय पर नहीं दी गई। कंप्यूटर इंजीनियरिंग विभाग में आवश्यकता आधारित शिक्षक कार्यरत हैं, लेकिन ऑनलाइन क्लास बाध्य होकर करनी पड़ रही है। कई छात्र अपने रिजल्ट व फीस संबंधित जानकारी को लेकर असमंजस में हैं।

छात्रों की मुख्य मांग-प्राचार्य की तानाशाही से मिले मुक्ति
छात्रों ने शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव को संबोधित पत्र में मांग की है कि उन्हें प्राचार्य की तानाशाही से मुक्ति दिलाई जाए और संस्थान में पढ़ाई का माहौल बहाल किया जाए। अब देखना यह है कि उपायुक्त की रिपोर्ट के बाद उच्च तकनीकी शिक्षा विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है। छात्रों को न्याय मिलेगा या नहीं, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
