अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर वन अर्थ, वन हेल्थ थीम पर
आधारित छऊ नृत्य के माध्यम से योग के अष्टांग स्वरूप की जीवंत
व्याख्या, छऊ नृत्य में समाहित है योग की आत्मा-तपन पटनायक
seraikella सरायकेला में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र के पूर्व निदेशक एवं संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात छऊ गुरु तपन कुमार पटनायक ने छऊ नृत्य और योग के गूढ़ संबंध को एक अनुपम सांस्कृतिक प्रस्तुति के माध्यम से दर्शाया।

वन अर्थ, वन हेल्थ थीम की वैश्विक थीम को सार्थक करते हुए उन्होंने स्थानीय कलाकारों के साथ मिलकर छऊ नृत्य की विविध मुद्राओं में योग के अष्टांग स्वरूप को सजीव किया। छऊ का आयोजन न केवल एक सांस्कृतिक प्रदर्शन था, बल्कि योग के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक पहलुओं को माध्यम से रेखांकित करने का एक आध्यात्मिक प्रयास भी था। मौके पर श्री पटनायक ने कहा के छऊ नृत्य की जड़ें भारतीय पौराणिक परंपरा में गहराई से जुड़ी हैं।
इसे शिव के तांडव रूप से प्रेरित माना जाता है। शिव स्वयं योगीश्वर हैं योग के आदि स्रोत। इसी आधार पर छऊ नृत्य को न केवल एक कलात्मक विधा, बल्कि योग के सजीव रूपांतरण के रूप में भी देखा जाता है। योग के आठ अंगो को यदि गहराई से देखा जाए, तो वे छऊ नृत्य की तकनीक और भाव भंगिनी में सहज रूप से समाहित है। छऊ गुक पटनायक ने बताया कि छऊ नृत्य का आध्यात्मिक आधार अर्धनारीश्रृर की अवधारणा है। जहां शिव और शिक्त एकाकार होते हैं।
यही समरसता छऊ की शैली में भी दृष्टिगोचर होती है। सौम्यता और शिक्त का अ˜ुत मिश्रण है। गुरु तपन पटनायक ने आमजन को आह्वान किया योग करे, छऊ करे, निरोग रहे। इस विशेष आयोजन में गुरु पटनायक के साथ कई नामचीन छऊ कलाकार भी शामिल हुए। जिनमें कुसमी पटनायक, प्रफुल्ल नायक, ठंगरु मुखी, लक्ष्मी प्रिया दास, सुश्री सुहाना सिंहदेव, राम महतो, सुखमती नायक, अंबुज महतो और दशरथ महतो प्रमुख रहे।
