सरायकेला कोऑपरेटिव बैंक घोटाला: एसीबी कोर्ट का बड़ा फैसला, तीन दोषियों को सजा
Seraikella
सरायकेला। जिला मुख्यालय सरायकेला स्थित चर्चित कोऑपरेटिव बैंक घोटाला मामले में एसीबी की विशेष अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्थानीय व्यवसायी संजय डालमिया और तत्कालीन शाखा प्रबंधक सुनील सतपति को 10-10 वर्ष के कारावास तथा 40-40 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। वहीं बैंक कर्मचारी मनीष देवगन को दोषी मानते हुए 5 वर्ष के कारावास और 5 हजार रुपये के जुर्माने की सजा दी गई है। अदालत ने यह भी माना कि मनीष देवगन की यह पहली गलती थी।
इससे पहले 24 मार्च को एसीबी की विशेष अदालत ने सरायकेला कोऑपरेटिव बैंक में हुए लगभग 33 करोड़ रुपये के घोटाले के मामले में तीनों आरोपियों को साक्ष्यों के आधार पर दोषी करार दिया था। सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए 30 मार्च की तिथि तय की गई थी, लेकिन सुनवाई पूरी नहीं हो पाने के कारण इसे 2 अप्रैल तक स्थगित कर दिया गया था।
फैसले से पहले सरायकेला शहर के चौक-चौराहों पर इस मामले को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म रहा। दोपहर बाद जैसे ही अदालत का फैसला आया, लोगों के बीच इसकी व्यापक चर्चा शुरू हो गई।
मामले की जांच एसीबी के डीएसपी अनिमेष कुमार गुप्ता ने की थी। उन्होंने अदालत में पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत कर आरोपों को साबित किया।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला वर्ष 2019 का है, जब सरायकेला स्थित कोऑपरेटिव बैंक में करोड़ों रुपये के ऋण वितरण में अनियमितताओं का खुलासा हुआ था। जांच में सामने आया कि कुल लगभग 38 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया गया, जिसमें से करीब 32 करोड़ रुपये का लोन अकेले संजय डालमिया द्वारा लिया गया था, जबकि शेष लगभग 4 करोड़ रुपये अन्य लोगों को दिए गए थे।
सबसे गंभीर बात यह रही कि ऋण वितरण के बाद बैंक प्रबंधन द्वारा वसूली के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिससे मामला घोटाले के रूप में सामने आया।
इस फैसले को क्षेत्र में एक बड़ी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है, जिससे वित्तीय अनियमितताओं पर अंकुश लगाने की दिशा में कड़ा संदेश गया है।
