खूँटपानी उद्यान महाविद्यालय में दीक्षारंभ कार्यक्रम मे
गुणवत्ता, पोषण और मूल्य संवर्धन पर ध्यान देने पर जोर, राज्य में
कृषि एवं बागवानी क्षेत्र में अपार संभावनाएं-डॉ. विशाल नाथ
khutpani
खूँटपानी के उद्यान महाविद्यालय में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए दीक्षारंभ कार्यक्रम का आयोजन उत्साहपूर्ण वातावरण में किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत महाविद्यालय के सह-अधिष्ठाता डॉ. अरुण कुमार सिंह के स्वागत भाषण देते हुए उनके वैज्ञानिक योगदान एवं अनुभवों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित आईसीएआरदृआईएआरआई, झारखंड के प्रधान वैज्ञानिक एवं अकादमिक समन्वयक डॉ. विशाल नाथ ने विद्यार्थियों को बागवानी क्षेत्र में करियर की व्यापक संभावनाओं पर विस्तार से जानकारी दी।

डॉ. विशाल नाथ ने हरित क्रांति का उल्लेख करते हुए बताया कि डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन के नेतृत्व में पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कृषि उत्पादन में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई थी। उन्होंने कहा कि जहां इन राज्यों में फसल सघनता लगभग 200 प्रतिशत है, वहीं झारखंड में यह 120दृ121 प्रतिशत के आसपास है, जो राज्य में कृषि एवं बागवानी विकास की अपार संभावनाओं को दर्शाता है।

उन्होंने कृषि उत्पादन के आँकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि देश में खाद्यान्न उत्पादन वर्ष 2015-16 के 251.54 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में 357.73 मिलियन टन हो गया है। वहीं बागवानी उत्पादन 2013-14 के 280.70 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में 367.72 मिलियन टन तक पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि पहले “एक अनार सौ बीमार” जैसी कहावतें प्रचलित थीं, लेकिन अब फलों का उत्पादन काफी बढ़ा है। अब आवश्यकता गुणवत्ता, पोषण और मूल्य संवर्धन पर ध्यान देने की है। डॉ. नाथ ने कहा कि महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना और कर्नाटक जैसे राज्यों की भौगोलिक परिस्थितियां झारखंड से मिलती-जुलती हैं, फिर भी वे बागवानी में आगे बढ़ चुके हैं। झारखंड भी पीछे नहीं है। राज्य बेल उत्पादन में देश में दूसरे, लीची में चौथे, कटहल में छठे तथा मिर्च उत्पादन में आठवें स्थान पर है। उन्होंने बताया कि झारखंड की कृषि-जलवायु परिस्थितियां फलोत्पादन के लिए अत्यंत अनुकूल हैं। आम में शीघ्र पुष्पन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि समयपूर्व फलन से किसानों को बेहतर बाजार मूल्य मिल सकता है। उन्होंने विशेष रूप से प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन पर जोर देते हुए कहा कि कटहल जैसे उत्पादों में निर्यात की बड़ी संभावनाएं हैं। यदि राज्य में प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना हो तो युवाओं के लिए उद्यमिता के नए अवसर सृजित हो सकते हैं। रेडी-टू-कुक और रेडी-टू-ईट उत्पादों के माध्यम से किसानों को बेहतर लाभ मिल सकता है। अंत में उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि अध्ययन काल ही भविष्य की मजबूत नींव रखने का समय है। बागवानी केवल उत्पादन तक सीमित नहीं, बल्कि प्रसंस्करण, विपणन, निर्यात और एग्री-बिजनेस से जुड़ा व्यापक क्षेत्र है, जिसमें युवाओं के लिए अपार संभावनाएं हैं। कार्यक्रम का संचालन अंजलि विवा मिंज, सहायक प्राध्यापक द्वारा किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के सभी सहायक प्राध्यापक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
