सेरेंगसिया शहीद स्मारक पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अर्पित की श्रद्धांजलि, 1,479 युवाओं मे नियुक्ति पत्र का किया वितरित, सेरेंगसिया की भूमि संघर्ष, साहस और बलिदान का प्रतीक है-हेमंत सोरेन
Chaibasa
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रविवार को पश्चिमी सिंहभूम जिले के टोटो ब्लॉक में ऐतिहासिक सेरेंगसिया शहीद स्मारक का दौरा किया, जहां उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम और आदिवासी अधिकारों के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले बहादुर शहीदों को श्रद्धांजलि दी. मुख्यमंत्री ने स्मारक पर फूल चढ़ाए और उनके सर्वोच्च बलिदान को याद करते हुए एक मिनट का मौन रखा.

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि सेरेंगसिया की भूमि संघर्ष, साहस और बलिदान का प्रतीक है. यहां के शहीदों ने अपनी पहचान, अधिकारों और आत्म-सम्मान की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी. उन्होंने कहा कि इन बहादुर योद्धाओं का योगदान झारखंड के इतिहास में अमिट रहेगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा.

मुख्यमंत्री ने आदिवासी समुदाय की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि आदिवासी समुदाय ने झारखंड की संस्कृति, परंपराओं और पहचान को बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. उन्होंने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार शहीद स्थलों के संरक्षण और विकास के लिए गंभीरता से काम कर रही है ताकि इन ऐतिहासिक स्थानों को राष्ट्रीय पहचान मिल सके.
श्रद्धांजलि देने के बाद, मुख्यमंत्री सेरेंगसिया शहीद श्रद्धांजलि, परियोजना उद्घाटन-शिलान्यास और संपत्ति वितरण समारोह में शामिल हुए. इस दौरान उन्होंने कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया. उन्होंने विभिन्न विभागों में चयनित 1,479 युवाओं को नियुक्ति पत्र भी वितरित किए. नियुक्ति पत्र पाने वालों में काफी उत्साह देखा गया.

अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने “सरकार आपके द्वार” कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य सरकार लोगों की समस्याओं को दूर करने के लिए गांवों तक पहुंच रही है. उन्होंने कहा कि पहले ग्रामीण इलाकों में बिजली की समस्या थी, लेकिन अब सरकार ने पुराने बिजली बिल माफ कर दिए हैं और 200 यूनिट मुफ्त बिजली दे रही है.
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य शिक्षा के माध्यम से युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना और कमजोर वर्गों के शोषण को रोकना है. मुख्यमंत्री ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पिछले 25 सालों में बीजेपी ने झारखंड को विकास के बजाय लूट का केंद्र बना दिया था, जबकि JMM सरकार अपने वादे पूरे कर रही है.
महिला सशक्तिकरण पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि मंईयां सम्मान योजना के तहत अकेले पश्चिमी सिंहभूम में दो लाख से अधिक महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं. उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड लोक सेवा आयोग के जरिए हजारों युवाओं को नौकरियां दी गई हैं और जनवरी 2026 तक 25,000-26,000 नियुक्तियां की गई हैं.
असम में आदिवासियों पर हो रहे अत्याचारों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने चिंता जताई और कहा कि वहां कई आदिवासी गांवों को जला दिया गया है और लोग असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि झारखंड का आदिवासी समुदाय असम में अपने भाइयों और बहनों के साथ खड़ा है, और अगर जरूरत पड़ी तो पूरा राज्य उनके समर्थन में आगे आएगा.
उन्होंने माता-पिता से अपील की कि वे अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करें ताकि वे इंजीनियर, डॉक्टर, IAS और IPS अधिकारी बन सकें. उन्होंने बताया कि सावित्रीबाई फुले योजना के तहत स्कूली बच्चों को मदद दी जा रही है और 18 से 50 साल की महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये मिल रहे हैं.
कार्यक्रम के आखिर में, मुख्यमंत्री ने स्थानीय लोगों से बातचीत की और उनकी समस्याएं सुनीं. उन्होंने अधिकारियों को इलाके में सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर खास ध्यान देने का निर्देश दिया.
कार्यक्रम में परिवहन मंत्री दीपक बिरुआ, सांसद जोबा मांझी, विधायक निरल पूर्ति, विधायक दशरथ गगराई, विधायक सुखराम उरांव, विधायक सोनाराम सिंकू, विधायक सविता महतो, विधायक समीर मोहंती, विधायक संजीव सरदार, विधायक जगत मांझी, विधायक सोमेश चंद्र सोरेन, जिला परिषद अध्यक्ष लक्ष्मी सुरीन, पुलिस उप महानिरीक्षक अनुरंजन किस्पोट्टा, उपायुक्त चंदन कुमार और पुलिस अधीक्षक अमित रेणु सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे.
