कुचाई के सियाडीह फुटबॉल प्रतियोगिता और टुसू मेला में
परंपरा की झलक देखने को मिला, रायगुडू नवाडीह बना चैम्पियन, टुसू
पर्व झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है-गागराई
Kuchai
कुचाई प्रखंड के सियाडीह में सरस्वती पूजा एवं बंसत पंचमी के उपलक्ष्य पर मिलन मेला समिति सियाडीह के द्वारा आयोजित दो दिवसीय फुटबॉल प्रतियोगिता एवं टुसू चौडाल नाच गान प्रतियोगिता संर्पन्न हो गई। टुसू मेला में कुचाई़ प्रखंड के विभिन्न गांवों से महिलाएं पारंपरिक चौड़ल लेकर पहुंचीं और लोकगीतों पर नृत्य प्रस्तुत किया। चौड़लों को आकर्षक व पारंपरिक शैली में सजाया गया था। वही डीजे डांस ग्रुप के कलाकारों ने छोपोल-छापोल आदिवासी नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस फुटबॉल प्रतियोगिता और टुसू मेला में झारखंड की आदिवासी संस्कृति और परंपरा की शानदार झलक देखने को मिली।

फुटबॉल प्रतियोगिता के फाईनल मैंच में कुंडा एफसी को 2-1 से पराजित कर रायगुडू नवाडीह की टीम चैम्पियन बना। जबकि महिला वर्ग फुटबॉल प्रतियोगिता में हेम्ब्रम एफसी विजेता बनी। फुटबॉल प्रतियोगिता के फाईनल मैच का शुभआरंभ खरसावां विधायक दशरथ गागराई ने खिलाडियों से परिचय और फुटबॉल को कीक मारकर किया।

इस पुरूष वर्ग के प्रतियोगिता में कोल्हान क्षेत्र कुल 32 फुटबॉल टीमों ने भाग लिया। साथ ही प्रतियोगिता में विजेता व उपविजेता टीमों को नगद पुरस्कार देकर सम्मानित किया। फुटबॉल प्रतियोगिता में चैम्पियन रहे रायगुडू नवाडीह टीम को 35 हजार, उप विजेता कुंडा एफसी को 25 हजार, तृतीय स्थान पर रहे राजीव गांधी एफसी को 10 हजार, चौथा स्थान पर रहे तुईदिरी एफसी को 10 हजार, पांचवा स्थान प्राप्त करने वाले निशांत स्पोर्टिग, छठा स्थान स्थान प्राप्त करने वाले टोन्डांग एफसी, सातवां स्थान प्राप्त करने वाले आराध्या एफसी तथा आठवां स्थान प्राप्त करने वाले पोकेट एण्ड रोकेट सरायकेला को 5-5 हजार नगद पुरस्कार देकर सम्मानित किया। इसके अलावे ऑफ द मैच, मैन ऑफ द सिरिज, बेस्ट स्कोरर, बेस्ट गोलकीपर को भी सम्मानित किया गया। जबकि महिला वर्ग फुटबॉल प्रतियोगिता के वितेता टीम हेम्ब्रम एफसी को 12 हजार देकर सम्मानित किया गया। इसके अलावे टुसू प्रतियोगिता मेें शामिल सभी टुसू एवं चौटाल प्रदर्शनी एवं नाच गान प्रतियोगिता को संत्वंना पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। मौके पर श्री गागराई ने कहा कि झारखंड में फुटबॉल केवल एक खेल नहीं, बल्कि जनजातीय संस्कृति, जीवंतता और सशक्तिकरण का प्रतीक है। टुसू पर्व झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। यह पर्व न केवल लोक आस्था से जुड़ा है, बल्कि सामाजिक एकता और परंपराओं को भी मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि आज के समय में ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपरा से जोड़ने की आवश्यकता है। इस दौरान मुख्य रूप से विधायक दशरथ गागराई, सासंद प्रतिनिधि मानसिंह मुंडा, विधायक प्रतिनिधि धमेंन्द्र सिंह मुंडा, मुखिया करम सिंह मुंडा, मुखिया मंगल सिंह मुंडा, मुन्ना सोय, राहुल सोय, धनश्याम सोय आदि उपस्थित थे।
रंग-बिरंगे चौडल बने टुसू मेले में आकर्षण के केंद्र
कुचाई क्षेत्र का यह ऐतिहासिक एवं सबसे महत्वपूर्ण टुसू मेला है। जिसमें क्षेत्र के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और ग्रामीण शामिल होते हैं। इस वर्ष भी मेले में दो दिनों में दूर-दराज के गांवों से आए लोगों की भारी भीड़ देखने को मिली। मेले का मुख्य आकर्षण विभिन्न गांवों से लाए गए रंग-बिरंगे और आकर्षक चौडल रहे। पारंपरिक साज-सज्जा से सजे चौडलों को देखने के लिए लोग उत्साहपूर्वक मेला परिसर में जुटे रहे। पारंपरिक गीत-संगीत और नृत्य के माध्यम से ग्रामीणों ने टुसू पर्व की खुशियां साझा कीं और अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखा। बच्चों और महिलाओं के लिए विशेष आकर्षण मेले में बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले, टॉय ट्रेन, सूट गन पॉइंट, जंपिंग ट्रेम्पोलिन, कार झूला एवं नाव झूले लगाए गए थे, जहां बच्चों की खूब चहल-पहल रही। खिलौनों की दुकानों पर बच्चों के साथ-साथ अभिभावकों की भी खासी भीड़ देखी गई। वहीं महिलाओं के लिए पारंपरिक श्रृंगार सामग्री, चूड़ियां और मिठाइयों की दुकानें भी आकर्षण का केंद्र बनी रहीं।
