भोपाल के प्रसिद्ध भारत भवन में आयोजित महाभारत, कालजयी सभ्यता की महागाथा में नृत्य उरुभंगम के माध्यम से सरायकेला छऊ की भव्य प्रस्तुति,
Kharsawan
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के प्रसिद्ध भारत भवन में आयोजित महाभारत, कालजयी सभ्यता की महागाथा में नृत्य उरुभंगम के माध्यम से सरायकेला छऊ की भव्य प्रस्तुति दी गई। इस कार्यक्रम के माध्यम से महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित कौरवों और पांडवों के मध्य हुए धर्म और अधर्म के महायुद्ध की कथा को प्रस्तुत किया गया। छऊ नृत्य कला केंद्र सरायकेला- खरसावां एवं रजतेंदु छऊ कला निकेतन के एस एन ए अवॉर्डी गुरु श्री तपन कुमार पटनायक एवं श्री वरीय फेलो श्री रजतेंदु रथ के निर्देशन में महाभारत के प्रमुख अध्यायों की मनमोहक प्रस्तुति दी गई।

सरायकेला छऊ के द्वारा प्रस्तुत उरुभंगम कार्यक्रम में नारी शक्ति के अपमान का असफल प्रयास द्रोपदी के चीर हरण, धर्म और अधर्म के महायुद्ध में कौरवों के साथ देने वाले द्रोणाचार्य और कर्ण के दुखद अंत सहित दुर्योधन के अहंकार पर भीम की गदा के प्रहार का सजीव चित्रण किया गया । बीर भारत न्यास, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति विभाग के सौजन्य से लगभग एक घंटे के इस कार्यक्रम में महाभारत के विभिन्न अध्यायों को एक सूत्र में पिरोने हेतु सूत्रधर की भूमिका में गुरु तपन कुमार पटनायक, श्री कृष्ण की भूमिका में संजय कर्मकार, यज्ञसिनी की भूमिका में कुसुमी पटनायक, द्रोपदी की भूमिका में परि, भीष्म की भूमिका में रजतेंदु रथ, भीम की भूमिका में वरीय फेलो श्री निवारण महतो, दुर्योधन के रूप में काली प्रसन्न षाडंगी, द्रोणाचार्य की के रूप में गणेश परिछा, अर्जुन की भूमिका में सनथ कुमार साहू, कर्ण की भूमिका में होली कुम्हार, सैनिक के रूप में बिजेन सरदार, बुद्धेश्वर कुमार, बैसाखू सरदार ने महाभारत के इन चरित्रों को अत्यंत ही आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया। वाद्य कलाकारों में बांसुरी पर वरीय फेलो श्री देवराज दुबे ने मनमोहक राग छेड़ा, जबकि ढोल पर बाबूराम सरदार और वरीय फेलो श्री पूर्ण सरदार ने थाप दी। 16 से 24 जनवरी तक चलने वाले इस कार्यक्रम का उद्घाटन 16 जनवरी को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव ने किया था । इस कार्यक्रम में जापान, इंडोनेशिया और श्रीलंका सहित देश विदेश के कई विख्यात रंग समूह भाग ले रहे हैं।
नृत्य निदेशक गुरु तपन कुमार पटनायक ने कहा कि हमारी सभ्यता के प्रतीक महाकाब्य महाभारत न केवल हमारी धार्मिक आस्था के प्रतीक है बल्कि यह संपूर्ण रूप से भारत के सामाजिक, राजनीतिक और आध्यात्मिक पहलुओं का जीवंत चित्रण भी है।
