भगवान बिरसा मुंडा ने जल – जंगल – जमीन और समाज के अस्तित्व के लिए अंग्रेजों के साथ खुनी संघर्ष किया था-सोहन लाल कुम्हार,
Seraikella
अनुसूचित जनजाती एवं अन्य परंपरागत वन निवासी ( वनों पर अधिकारों की मान्यता ) के केन्द्रीय सदस्य श्री सोहन लाल कुम्हार ने कहा कि 15 नवंबर सम्पूर्ण आदिवासी गौरव दिवास माना रहा है।

आज का दिन ही झाडखण्ड भी बिहार से अलग हुआ था। बिरसा मुण्डा का भी जन्म आज ही हुआ था। बिरसा मुण्डा ने जल – जंगल – जमीन और समाज के अस्तित्व के लिए अंग्रेजों के साथ खुनी संघर्ष किया था। इन्हीं के संघर्ष के कारण अंग्रजों को छोटा नागपुर के अन्दार शान्तिपूर्वक पैर पसारने नहीं सका । बिरसा के संघर्ष फलस्वरूप छोटानागपुर कास्तकारी अधिनियम 1908 बना जिसे CNT.Act 1908 भी कहा जाता है।

आज यदि CNT Act 1908 नहीं होता तो सम्पूर्ण झाड़खण्ड के जल – जंगल -जमीन पर पूंजिपतियों के हाथ में हुआ होता तथा गैर आदिवासी ओने – पोने दामों में खरीद कर कब्जा कर लेते । आज CNT . Act आदिवासियों तथा मूलवासियों के लिए सुरक्षा कवक्ष बना हुआ है। बिरसा के इस सहांसी संघर्ष से प्रभावित होकर भरत देश ने झाड़खण्ड में गौरव दिवास मनाने का घोषणा किया है। लेकिन अपसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि सरायकेला – खरसावां जिला की ओर से वनाधिकर कानून 2006 के तहत सामुदायिक बनाधिकर प्रमाण -पत्र देकर एक भी आदिवासी वनाश्रित ग्रामों को सम्मानित नहीं किया गया जबकि आदिवासी ग्रामों को आदर्श ग्राम में परिणत करने के नाम पर सरायकेला खरसावाँ के दो – दो उपायुक्तों को राष्ट्रपति ने सम्मान कर चुके है। बावजूद भी आदिवासी सम्मान दिवस में एक भी वनाधिकार प्रमाण – पत्र वितरण न करना चिन्ता का विषय है। प्रसाशन अपने स्तर से एक भी दावा अभिलेख तैयार कर वितरण कर नहीं पा रही है फिर जब कोई संस्था, संगठन तथा व्यक्ति सम्पूर्ण प्रक्रिया पूराकर तैयार कर देती है तो क्यों नहीं बाँटा जाता है। उपायुक्त के यहाँ कई CFR तथा IFR लंबित पड़े है ।
