राजखरसावां-कुचाई मे सिंदूर खेल बंगाली महिलाओं ने दी
मां दुर्गा को अंतिम विदाई, बोलीं-हे मां अगले साल फिर आना…,
kharsawan
दुर्गा पूजा उत्सव का आखिरी दिन में देशभर में विजयादशमी यानी दशहरे का त्योहार मनाया जा रहा है। ऐसे में दुर्गा पूजा के आखिरी दिन यानी विजयादशमी पर राजखरसावां के श्री श्री आमदा ठाकुरबाडी पूजा समिति के पूजा पंड़ाल में एवं कुचाई में श्री श्री 108 सार्वजनिक दुर्गा पूजा मंदिर में बंगाली समुदाय की महिलाओं ने सिंदूर खेला उत्सव में भाग लिया और एक दूसरे को सिंदूर लगाया। महिला श्रद्धालुओं की मानें तो कोरोना काल में पहली बार दुर्गा पूजा की अनुमति मिली है।

बंगाली समुदाय के लिए यह त्योहार काफी अहम माना जाता है। विजयादशमी के दिन मां दुर्गा को सुहागिन महिलाएं सिंदूर अर्पण कर अंतिम विदाई देती हैं। साथ ही प्राथना करती हैं कि हे मां आप अगले साल आएं और खुशहाली लाएं। गौरतलब है कि नवरात्रि के अंतिम दिन दुर्गा पूजा का विशेष महत्व है। इसी दिन दशहरे के अवसर पर बंगाली समुदाय की महिलाएं मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित करती हैं। जिसे सिंदूर खेला की रस्म कहा जाता है। बंगाली महिलाओं के लिए सिंदूर खेला एक बड़ी और विशेष रस्म है। मान्यता है कि दशहरे के दिन मां दुर्गा की धरती से विदाई होती है और इस उपलक्ष्य में सुहागने महिलाएं उन्हें सिंदूर अर्पित कर आशीर्वाद लेती हैं। खरसावां के बजारसाही स्थित दुर्गा मंदिर में सरकारी पूजा समिति, सेवा संघ पूजा समिति तलसाही, श्री श्री दुर्गा पूजा समिति बेहरासाई, श्री श्री आमदा ठाकुरबाडी पूजा समिति, ज्ञान मंदिर पूजा समिति नयाबजार आमदा, रेलवे कालोनी दुर्गा पूजा समिति राजखरसावां एवं श्री श्री दुर्गा पूजा समिति बडासाई खरसावां में मां दूर्गा की पूजा अर्चना की गई।
