कुचाई के सेरेगदा मे वनाश्रितो ने मनाई वनाधिकार बोर्डगाड़ी स्थापना दिवस, वन संरक्षण का लिया संकल्प, वन-पर्यावरण संरक्षण पत्थलगड़ी का उद्देश्य-गागराई
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कुचाई प्रखण्ड अन्तर्गत सेरेंगदा में सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समिति के अध्यक्ष सुकरा सरदार के नेतृत्व में पारंपरिक रूप से प्रथम बर्षीय वनाधिकार बोर्डगाड़ी स्थापना दिवस किया गया। इस दौरान रायसिंहदिरी, धातकीडीह, चम्पत, दामादीरी से आए वनाश्रितो ने पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ सामूहिक पूजा-अर्चना किया गया। मौके पर वनाधिकार कानून 2006 के तहत सामुदायिक वन संसाधन के संरक्षण, प्रबंधन व पुनर्जीवित करने पत्थलगड़ी के मुख्य उद्देश्यों को बताते हुए सामूहिक रूप से वन संरक्षण का संकल्प लिया गया।

ताकि वनोपज के जरीये जीविकापार्जन हो सके। बोर्डगाड़ी स्थापना दिवस कार्यक्रम में मुख मुख्यअतिथि के रूप में उपस्थित खरसावां विधायक दशरथ गागराई ने कहा कि वन-पर्यावरण संरक्षण पत्थलगड़ी का मुख्य उद्देश्य है। हमें अपनी परंपरा व संस्कृति को बचाए रखना है। जंगल से ही हमारा अस्तित्व है। उन्होंने कहा कि वन है तो ही जीवन है। जल, जंगल व जमीन से ही आदिवासियों का अस्तित्व जुड़ा हुआ है। हमें हर हाल में जंगलों के साथ साथ जैव विभिधताओं को संरक्षित करना है। जबकि सोहन लाल कुम्हार ने कहा कि वनाश्रित महिलाओ का समूह गठन कर वनोपजों का संग्रहण कर उपयुक्त बजारों में विक्रय करने पर जोर दिया जाये। ताकि सही दाम मिले। चिरौंजी, साल बीजा, हर्रा, बहेरा, के लिये बाजार का व्यवस्था कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि कुचाई के सेरेंगदा ग्राम को 2021 को जिला स्तरीय वनाधिकार समिति सरायकेला -खरसावां के मध्यम से सामुदायिक वनाधिकार प्रमाण-पत्र मिला है।

सरकार ने जंगल का संरक्षण, सम्बर्धन, पुनुरुज्जीवित, उपयोग और प्रबंधन करने का अधिकार प्रदान की है। साथ ही साथ धारा 5 के तहत जैवविविधताओं और वन्य प्राणियो के संरक्षण करने, पारिस्थितिकीय संवेदनशील, जलास्रोतों का संरक्षण , विनाशकारी व्यवहारो को रोक-थाम करने का अधिकार विधि में मान्य किया गया है। संस्कृतिक, विरासत को संरक्षित करने और वैसे योजनाओं पर प्रतिबंध लगाने का भी अधिकार दिया गया है जिसे वन्य जीव, वन और जैव विविधताओं पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। लेकिन वन विभाग अपनी आदतों से बाज नहीं आ रहा है। वही भरत सिंह मुण्डा ने जंगलों की विना अनुमति काटाई बंद करने, महुआ चुनने तथा शिकार करने के नाम पर जंगल में आग नहीं लगाने, जलावन के लिये फलदार तथा ईमारत पेड़ों को नहीं बल्कि टेड़े-मेड़े, मरे हुए तथा झाड़-झाड़ियों को काटने, किसी भी प्रकार के वन्य प्राणियों को शिकार नहीं करने, हर साल ग्राम सभा तथा सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समिति देशीय पौधों का रोपण करने, जैवविविधता सूची हर पाँच साल में तैयार करने, विनाशकारी परियोजनाओं को वन क्षेत्रों में गतिविधि के लिए स्वीकृति नहीं देने, ग्राम सभा ने सरकार के मार्गदर्शिका- नुसार सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समिति गठन कर दिया है। वन विभाग एवं अन्य विभाग इस समिति को वितीय सहयोग करने की जानकारी दी। इस दौरान मुख्य रूप से डुबराय कुम्हार, पाण्डु मुण्डा, सुमी मुंडा, पुस्तौरी सरदार, सोनिया सरदार, सावित्री सरदार, सकारी मुंडा, सोनाराम सरदार, सिंगराय सरदार, धरमसिंह सरदार, सोमा सरदार, जगनाथ प्रमाणिक, सोहरोई मुण्डा आदि थे।
