अपनी दैवीय शक्ति व भक्ति के लिए लोक आस्था का केंद्र है बागरायडीह का माता दुर्गा मंदिर
Seraikella
सरायकेला: जिला मुख्यालय सरायकेला से महज 15 किमी दूर खरसावां प्रखंड के बागरायडीह गावं में स्थित माता दुर्गा की प्राचीन मंदिर अपनी दैवीय शक्ति और भक्ति के लिए लोक आस्था का केंद्र रहा है. इस मंदिर के प्रति लोगों की आस्था आध्यात्मिक शक्ति और भक्ति से जुड़ी है. यहां वर्ष 1940 से मां दुर्गा की प्रकृति रूप में वनदुर्गा के स्वरूप में पूजे जाने का विधान है. मान्यता है कि यहां भक्त श्रद्वालुओं द्वारा सच्चे मन से मांगी गयी हर मुराद पूरी होती है. यहां माता के वनदेवी रुप की भक्ति व आस्था के साथ पूजा की जाती है. दुर्गा मंदिर पूजा समिति द्वारा बताया गया कि खरसावां प्रखंड के बागरायडीह स्थित प्राचीन माता दुर्गा मंदिर में दुर्गा पूजा को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गयी है. माता के मंदिर में विजयादशमी के दूसरे दिन एकादशी को विशेष पूजा होती है.

जिसमें हजारो भक्त श्रद्वालुओं की भीड़ उमड़ती है. माता की पूजा व आराधना के लिए यहां केवल सरायकेला-खरसावां जिले ही नही बल्कि झारखंड के अन्य जिलों के साथ पड़ोसी राज्य ओड़िसा व बंगाल से भी भक्त श्रद्वालु माता की पूजा करने पहुंचते है. पूजा समिति के कोषाध्यक्ष बबलू प्रधान ने बताया इस वर्ष 03 अक्टूबर शुक्रवार को पूजा सह मेला का आयोजन किया जाएगा.02 अक्टूबर को जागरण सह मां अम्बे की विधिवत पूजा अर्चना तथा सुबह 4 बजे से स्थानीय जलाशय से पूजा अर्चना कर मंदिर तक दांडी पड़ाव कार्यक्रम होगा. इसके पश्चात शिव पार्वती का शुभ विवाह, बेलवरन तथा अग्नि कुवांरी की पुजा होगी. पूरे दिन महाशक्ति की पूजा होगी और शाम 4 बजे से आगुन (निया) माड़ा कार्यक्रम होगा. जहां माता के भक्त अग्नि की वेदी पर चलकर भक्ति के शक्ति का प्रदर्शन करेंगे.

मंदिर में स्थापित है माता की जीवंत प्रतिमा
माता के मंदिर में मां दुर्गा का जीवंत प्रतिमा स्थापित है और साल भर प्रत्येक दिन माता की पूजा यहां होती है. ऐसे प्रत्येक सप्ताह रविवार को माता की विशेष पूजा होती है. एकादशी के दिन भारी संख्या में श्रद्धालु मां की आराधना करने पहुंचते हैं. भक्त श्रद्धालुओं का मानना है कि सच्चे मन से मां से की गई प्रार्थना असफल नहीं जाती है. एकादशी के दिन माता के दरबार में विशेष पूजा के साथ कई धार्मिक व पारम्परिक अनुष्ठान आयोजित होते है. जिसके साक्षी बनने पहुंचे भक्त श्रद्वालुओं की भीड़ मेला का रुप ले लेता है. इस दिन पूजा अर्चना के पश्चात भक्त मन्नत अनुसार दहकते अंगारो पर नंगे पावं चलते है. लेकिन माता की कृपा से भक्तो के पावं पर छाले तक नही पड़ते है. मन्नत अनुसार यहां बलि पूजन भी होता है.

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पूजा कार्यक्रम (2025) एक नजर
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खड़ा बसा-25 सिंतबर गुरुवार
महाषष्टी बेलवरण- 28 सिंतबर रविवार 3 बजे तक
महासप्तमी ठाकुरानी पूजा-29 सिंतबर सोमवार 5 बजे तक
महाष्टमी बड़ पूजा- 30 सिंतबर मंगलवार 6 बजे तक
महानवमी विश्राम 01 अक्टूबर बुधवार संध्या 6:30 बजे तक
विजयादशमी जागरण 02 अक्टूबर गुरुवार सुदशा व्रत
एकादशी मुख्य पूजा सह अग्नि परीक्षा-03 अक्टूबर शुक्रवार
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पूजा समिति ( 2025) एक नजर
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अध्यक्ष- नरेश प्रधान,सचिव विष्णु प्रधान,कोषाध्यक्ष-बबलू प्रधान एवं सदस्य समस्त ग्रामीण.
