सरायकेला मे जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन एमएसीटी मामलों पर: पीड़ितों को त्वरित मुआवजा देने पर दिया गया जोर,
Seraikella
सरायकेला सिविल कोर्ट स्थित लोक अदालत हॉल में मोटर वाहन दावा न्यायाधिकरण (MACT) से संबंधित जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम माननीय झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (JHALSA), रांची के निर्देशानुसार एवं श्री रामाशंकर सिंह, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सरायकेला-खरसावां के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया।

कार्यक्रम के दौरान मंच पर श्री तौसीफ मेराज, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA), सरायकेला-खरसावां, श्री प्रदीप उरांव, उप पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय), सरायकेला, श्री देबाशीष ज्योतिषी, सचिव, जिला बार एसोसिएशन, सरायकेला तथा श्री जलेश कबी, संयुक्त सचिव, जिला बार एसोसिएशन, सरायकेला उपस्थित थे।
कार्यक्रम में वक्ताओं के रूप में श्री तौसीफ मेराज (सचिव, डीएलएसए), श्री देबाशीष ज्योतिषी (सचिव, बार एसोसिएशन) एवं श्री सूनित कर्मकार (उप प्रमुख एलएडीसी) ने एमएसीटी मामलों से संबंधित विभिन्न संशोधनों, प्रक्रियाओं एवं लाभों पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर श्री चंदन कुमार (चिकित्सा पदाधिकारी, सरायकेला), परिवहन विभाग के मोटर यान निरीक्षक (प्रशिक्षु), पुलिस विभाग के अधिकारीगण, जिला परिवहन कार्यालय के कर्मी एवं अन्य संबंधित प्रतिभागी उपस्थित रहे।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सरायकेला-खरसावां श्री रामाशंकर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि सड़क दुर्घटना के मामलों में पीड़ितों अथवा उनके परिजनों को त्वरित मुआवजा प्रदान करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने यह भी बताया कि अब एमएसीटी मामलों में केवल ₹10/- कोर्ट फीस देय है, जिससे पीड़ितों को आर्थिक राहत मिल सके। उन्होंने प्रतिभागियों को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पूर्णतः पालन करने की अपील की तथा उन्हें जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सरायकेला द्वारा प्रदान की जा रही सेवाओं का लाभ उठाने हेतु प्रेरित किया।
उन्होंने यह भी बताया कि दुर्घटना से संबंधित दस्तावेजों को समयबद्ध रूप से प्रस्तुत किया जाना अनिवार्य है तथा मोटर वाहन अधिनियम में हुए नवीनतम संशोधनों की जानकारी भी साझा की। उन्होंने प्रतिभागियों से इस कार्यशाला को ज्ञानवर्धक, संवादात्मक और व्यावहारिक बनाने की अपील की ताकि वे अपने कार्यों में इसका प्रभावी क्रियान्वयन कर सकें।
कार्यशाला के माध्यम से प्रतिभागियों को एमएसीटी मामलों में शीघ्र न्याय, उचित दस्तावेजीकरण, संशोधित प्रावधानों एवं पीड़ितों के हित में कार्य करने के महत्व पर गहन जानकारी दी गई। अंततः, यह कार्यशाला सभी प्रतिभागियों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुई।
