खरसावां में मां बांसती की विधि विधान से की गई
पूजा-अर्चना, श्रद्वालुओं ने की सुख-शांति की कामना, विजयादशमी
पर होगा 50 ब्राम्हण युवाओं का निःशुल्क उपनयन,
Kharsawan खरसावां के बजारसाई स्थित मॉ बांसती मंदिर में श्री श्री 108 वां मॉ बासंती पूजा समिति के द्वारा बेलबरण के साथ मॉ बांसती की पूजा अर्चना शुरू हो चुकी है। इस पूजा-अर्चना में श्रद्वालुओं की भीड उमड़ पड़ी। श्रद्वालुओं ने पारंपरिक विधि विधान के साथ पूजा-अर्चना कर सुख-शाति की कामना की। बेलबरण, महासप्तमी, के साथ शुरू हुई पूजा में माता के दर्शन व पूजा-अर्चना के आसपास क्षेत्रों से श्ऱद्वालु पहुचे। श्रद्वालुओं ने पूजा-अर्चना कर सुख-शांति एवं मंगल कामना किया। शनिवार को महाअष्टमी, रविवार को महानवमी एवं सोमवार को विजयादशमी के अर्चना पूजा संर्पन्न्ा होगी। वही सामूहिक उपनयन संस्कार का कार्यक्रम किया जायेगा। जिसमें 50 ब्राम्हण युवाओं का निःशुल्क उपनयन (जेनवु) किया जाएगा। सप्तमी से लेकर विजया दशमी तक विशेष पूजा-अर्चना, हवन और चंडी पाठ का आयोजन किया जाएगा।
वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुई पूजा-अर्चना
खरसावां बाजार स्थित मां बासंती मंदिर में शुक्रवार को वैदिक मंत्रोच्चार और पंडितों द्वारा विधिवत पूजन कर पूजा-अर्चना की शुरुआत की गई। पूजा समिति के सचिव कामाख्या प्रसाद षाड़ंगी ने जानकारी देते हुए बताया कि मां बासंती की पूजा सिर्फ खरसावां ही नहीं, बल्कि समस्त विश्व कल्याण की भावना से की जाती है।
बलि की परंपरा और प्रसाद वितरण
मंदिर परिसर में बलि की पारंपरिक व्यवस्था भी की जाती है। बलि के बाद मां को खिचड़ी, मांस और खीरे का भोग अर्पित किया जाता है। इसके उपरांत प्रसाद को भक्तों के बीच वितरित किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में लोग हिस्सा लेते हैं।
विजयादशमी पर होगा ब्राम्हण युवाओं का उपनयन,
पूजा का समापन सोमवार को विजया दशमी के दिन होगा। इस दिन मंदिर परिसर में 50 ब्राम्हण युवाओं का निःशुल्क सामूहिक उपनयन संस्कार किया जाएगा। शाम को मां बासंती दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन कर पूजा का विधिवत समापन किया जाएगा।
सज-धज कर तैयार है बासंती मंदिर
पूजा को लेकर मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। मां बासंती दुर्गा की भव्य प्रतिमा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। खरसावां ही नहीं, आसपास के इलाकों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा में भाग लेने पहुंच रहे हैं।
ऐतिहासिक महत्व और लोक आस्था का केंद्र
खरसावां का बासंती मंदिर न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान भी है। ब्राह्मण समाज द्वारा 1903 से जारी इस परंपरा ने लोक आस्था को नई ऊंचाइयां दी हैं। पूजा समिति के सदस्य और स्थानीय लोग इसे गर्व की परंपरा मानते हैं।
पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण
खरसावां क्षेत्र में नवरात्र के इस अवसर पर भक्तिमय वातावरण बना हुआ है। मंदिर में दिन भर भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठान चलते रहते हैं। श्रद्धालु मां बासंती के दर्शन और आशीर्वाद के लिए कतारबद्ध होकर मंदिर पहुंच रहे हैं।
April 24, 2026 2: 27 pm
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