खरसावां में अक्षय तृतीया पर प्रभु जगन्नाथ की विशेष पूजा-अर्चना हुई, चक्के की पूजा कर प्रभु के रथ का निर्माण हुआ शुरू, रथयात्रा 16 जुलाई को,
Kharsawan
खरसावां में अक्षय तृतीया पर सोमवार को खरसावां व हरिभंजा के जगन्नाथ मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गई। इसके साथ रथ निर्माण के लिए लकड़ी व औजार की पूजा की गयी। अक्षय तृतीया को ही ओडिशा के पुरी समेत विभिन्न जगन्नाथ मंदिरों में रथ निर्माण कार्य शुरू करने की परंपरा है। पुजारियों ने पहले रथ के चक्के पर पूजा की। कुल्हाड़ी से लकड़ी के टोना को काटकर रथ निर्माण कार्य की शुरुआत की। मौके पर लोगों में प्रसाद वितरण किया गया। आगामी 16 जुलाई को प्रभु जगन्नाथ की रथ यात्रा निकाली जाएगी। पूजारी ने बताया कि भगवान जगन्नाथ, अग्रज बलभद्र एवं बहन सुभद्रा की रथ निर्माण कार्य प्रारंभ हुई है। भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के लिए साल की लकड़ी से रथ के पहिए का निर्माण किया जा रहा है। निर्माण कार्य एक महीने तक चलेगा। उन्होंने बताया कि अक्षय तृतीया के दिन से प्रभु जगन्नाथ के रथ निर्माण का कार्य शुभारंभ होता है। इसी रथ पर सवार होकर प्रभु अपने बड़े भाई बलराम एवं बहन सुभद्रा के साथ अपने मौसी के घर जाते हैं। पुजारी ने बताया कि खरसावां में पुरी के तर्ज पर रथयात्रा उत्सव का आयोजन किया जाता है। सारे विधि-विधान के साथ प्रक्रिया पूरी की जाती है। इस दौरान मुख्य रूप से पुजारी राजाराम शतपति, सुभाष सांडगी, सुब्रत शतपति, सुजीत हांजरा, जयजीत सांडगी, सुदीप सांडगी, अशोक राउत, जगन्नाथ पति आदि उपस्थित थे।

प्रभु जगन्नाथ की रथयात्रा 16 जुलाई को
अक्षय तृतीया से प्रभु जगन्नाथ की वार्षिक रथ यात्रा की तैयारी शुरू हो जाती है। मालूम हो कि इस वर्ष रथ यात्रा का आयोजन 16 जुलाई को होगा। प्रभु जगन्नाथ, बहन सुभद्रा व बड़े भाई बलभद्र के साथ रथ पर सवार हो कर 8 दिनों के लिये श्रीगुंडिचा मंदिर जायेंगे।
प्रभु जगन्नाथ की वार्षिक रथयात्रा के कार्यक्रम
स्नान पूर्णिमा-3 जून
नेत्र उत्सव-15 जुलाई
हेरा पंचमी- 21 जुलाई
बाहुड़ा यात्रा-24 जुलाई
खेतों में हल चलाकर हुई कृषि कार्य की शुरुआत
अक्षय तृतीया के दिन किसानों ने खेतों में हल चला कर व बीज डाल कर कृषि कार्य की शुरुआत की। मान्यता है कि अक्षय तृतीया के दिन कृषि कार्य शुरू करने पर क्षय नहीं होता है। इस दिन किये गये कार्यों का अक्षय पुण्य फल मिलता है। तेज धूप के बावजूद लोगों ने बीज डाल कर कृषि कार्य की शुरुआत की। हालांकि, अक्षय तृतीय के एक दिन पहले हुई बारिश ने किसानों को कुछ हद तक राहत भी दी थी,
