कुचाई के अरुवा में चैतपर्व पर हुई सांस्कृतिक छऊ नृत्य, कलाकारों ने दी भव्य प्रस्तुती, दर्शक हुए मंत्रमुग्ध, खरसावां छऊ नृत्य शैली संस्कृतियों का है संगम
Kharsawan
कुचाई प्रखंड के अंतर्गत अरूवां गांव में पारंपरिक चैत्र पर्व के अवसर पर सांस्कुतिक छऊ नृत्य का आयोजन किया गया। ग्रामीण शिव मंदिर में कलश स्थापना व पूजा के बाद कुम्हार टोली व सरदार टोली द्वारा रात भर चले इस आयोजन में पौराणिक व आधुनिक छऊ नृत्यों की प्रस्तुति दी गई। मौके पर वक्ताओं ने कहा कि छऊ नृत्य हमारी सांस्कृतिक धरोहर है। इसे बचाए रखना हम सबकी जिम्मेवारी है।

झारखंड में कला को बचाए रखने के लिए छऊ कलाकारों का सराहनीय योगदान है। छऊ क्षेत्र की जीवन रेखा है। छऊ नृत्य की कला परंपरा युगों युगों से चली आ रही है। खरसावां का छऊ नृत्य संस्कृतियों का संगम है। जो दूर दूर तक फैली है। इसकी महत्ता बनाए रखे। तभी कला का विकास संभव है। इस सांस्कुतिक छऊ नृत्य कार्यक्रम में पौराणिक कथाओं पर आधारित गणेश वंदना, नृत्य के चैत्र पर्व की शुरुआत की गयी। अरुवा में कलाकारों द्वारा प्रस्तुत भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीला पर आधारित माखन चोरी, राधा कृष्ण के प्रेम रस पर आधारित माया बंधन, असत्य पर सत्य की जीत स्वरुप महिषासुर वध आदि नृत्य की भव्य प्रस्तुती देकर दर्शको मंत्रमुग्ध दिया। वही पूरी रात दर्शक छऊ नृत्य का लृफ्त उठाते रहे। नृत्य रात भर चलता रहा जिससे देखने के लिए आसपास के ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी थी। छऊ नृत्य में खरसावा शैली का नृत्य हुआ। मौके पर मेला का भी आयोजन किया गया।
