छऊ महोत्सव में स्थानीय कलाकारों की अनदेखी पर उठे सवाल, उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन
Seraikella
सरायकेला–खरसावां:
राजकीय चैत्र पर्व सह छऊ महोत्सव को लेकर एक ओर जहां कला और कलाकारों के संरक्षण की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय कलाकारों की अनदेखी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। महोत्सव के मंच पर बाहरी कलाकारों को प्राथमिकता दिए जाने से क्षेत्रीय कलाकारों में गहरी नाराजगी देखी जा रही है।
स्थानीय कलाकारों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद उन्हें उचित अवसर नहीं मिल रहा, जिससे उनका मनोबल प्रभावित हो रहा है। उनका आरोप है कि इस तरह की व्यवस्था से स्थानीय कला परंपरा को बढ़ावा मिलने के बजाय उसे नुकसान पहुंच रहा है।
इसी मुद्दे को लेकर श्री श्री शिव शंभू छऊ नृत्य कला मंदिर, बागानसाईं के अध्यक्ष दशरथ महतो ने उपायुक्त को ज्ञापन सौंपते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि उनका संस्थान झारखंड सरकार से निबंधित है और हर वर्ष महोत्सव में भागीदारी करता रहा है, लेकिन इस वर्ष 11 से 13 अप्रैल तक आयोजित कार्यक्रम में उन्हें शामिल नहीं किया गया।
उन्होंने यह भी बताया कि महोत्सव की बजट सूची में उनके संस्थान का नाम दर्ज होने के बावजूद उन्हें मंच से दूर रखा गया, जो पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करता है।
दशरथ महतो ने महोत्सव में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कहा कि कई अपंजीकृत संस्थाओं को प्रस्तुति का मौका दिया गया, जबकि पंजीकृत संस्थानों को नजरअंदाज किया गया। इसके अलावा, एक ही परिवार के पति-पत्नी को अलग-अलग दिनों में मंच देने पर भी उन्होंने आपत्ति जताई।
नृत्य प्रतियोगिता को लेकर भी उन्होंने गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि एक ही टीम को दो हिस्सों में बांटकर प्रदर्शन कराया गया और वाद्य कलाकारों को अलग-अलग टीमों में शामिल किया गया, जो नियमों के खिलाफ है।
उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही भविष्य में पारदर्शिता के साथ स्थानीय कलाकारों को प्राथमिकता देने की भी अपील की है।
निष्कर्ष:
छऊ महोत्सव जैसे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक आयोजन में उठे ये सवाल न केवल व्यवस्था पर बल्कि कलाकारों के सम्मान और संरक्षण पर भी गंभीर चिंता खड़ी करते हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है।
