विशेष: प्योर ऑर्गेनिक तरीके से सब्जी की खेती कर रहे जिप सदस्य शंभू मंडल; दे रहे बेहतर स्वास्थ्य एवं स्वदेशी का संदेश, माटी से मूल रूप से जुड़े रहना और अपने एवं अपनों के स्वास्थ्य के लिए सजग रहना ही सब्जी खेती का उद्देश्य: शंभू मंडल
Seraikela
सरायकेला। कहते हैं कि उदाहरण अनेकों है और मौका बेमौका उदाहरण बताना भी आसान है। परंतु खुद उदाहरण बनना अपने आप में मिसाल होता है। कुछ ऐसा ही गम्हरिया भाग 13 के जिला परिषद सदस्य शंभू मंडल करते हुए देखे जाते हैं। भरपूर सामाजिकता के बाद राजनीति के बाद खेलकूद और उसके बाद धार्मिक संस्कृति एवं संस्कार में समय देने के बाद भी परिवार और परिजनों के लिए उनकी सोच उनके द्वारा तैयार की गई एक एकड़ भूमि में देखी जा सकती है। जहां उन्होंने विशुद्ध स्वदेशी तरीके से अपने और अपनों के लिए सब्जी की खेती की है। इतना ही नहीं उनके इस कार्य में 12 जरूरतमंद रोजगार भी पा रहे हैं। कुछ एक वर्षों से उसर पड़े कृषि भूमि को स्वयं से तैयार कर उपजाऊ बनाना और सब्जी की खेती करना, उनके लिए उदाहरण बन रहा है, जो आज के चकाचौंध लाइफस्टाइल की दुनिया में अपनी पुस्तैनी कृषि कार्य से भी मुंह मोड़ रहे हैं।
एक एकड़ जमीन पर ऑर्गेनिक सब्जी की दुनिया:-
हरा खाद, सुखे गोबर की खाद और राख से मिट्टी की उर्वरता बढ़ाते हुए जिला परिषद सदस्य शंभू मंडल उक्त भूमि पर एक परिवार सहित आसपास के अपनों के लिए साल भर के सब्जी उत्पादन का लक्ष्य लेकर सब्जी की खेती किये बताते हैं। जिसमें आलू और प्याज से लेकर बैगन, टमाटर, मटरछिमी, चना, ब्रोकली फूलगोभी, फूलगोभी, पत्ता गोभी, करेला, लौकी, धनिया पत्ता, मिर्च, मूली सहित अन्य सब्जियां भी शामिल हैं।
उद्देश्य:-
जिप सदस्य शंभू मंडल बताते हैं कि वे मूल रूप से कृषक परिवार से रहे हैं। और पिता स्वर्गीय गोपाल मंडल एवं माताजी स्वर्गीय रायमनी देवी की प्रेरणा से हमेशा कृषि से जुड़े रहे हैं। वर्तमान में स्थितियां बदलती हुई देख कृषि कार्य का उद्देश्य संदेश देने का है। जिसमें कृषि कार्य से विमुख हो रहे मूल कृषक परिवार को खेती की ओर लौटाने, साथ ही आज की युवा पीढ़ी को भागमभाग और चकाचौंध भरी दुनिया से अलग मूल भारतीय कृषि परंपरा से अवगत कराने तथा विशुद्ध ऑर्गेनिक तरीके से अपने एवं अपनों स्वास्थ्य के लिए सब्जी का उत्पादन करना है।
जिप सदस्य शंभू मंडल:-
जिला परिषद सदस्य शंभू मंडल पूर्व राष्ट्रीय खिलाड़ी रहने के साथ-साथ ग्रामीण फुटबॉल अकैडमी कोलाबीरा के संस्थापक एवं प्रमुख हैं। जिस अकादमी ने देश और राज्य को बेहतर फुटबॉल खिलाड़ी भी दिए हैं। इसके साथ ही शिवसेना बजरंग अखाड़ा कोलाबीरा के अध्यक्ष भी हैं। क्षेत्र में पशुधन रक्षा के लिए भी उनका संघर्ष हमेशा से अग्रणी रहा है। राजनीतिक जीवन के साथ-साथ खेल जीवन और सामाजिक जीवन में भी उनका एकमात्र मोटो रहता है कि आज की युवा पीढ़ी नशा पान जैसी गंदी लत से दूर रहे।
