जेल अदालत–सह–कानूनी जागरूकता एवं चिकित्सा जांच शिविर का भव्य आयोजन,
Seraikella
माननीय झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, रांची के निर्देश तथा श्री रामाशंकर सिंह, माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश–सह–अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डालसा), सरायकेला खरसावां के कुशल मार्गदर्शन में जिला जेल, सरायकेला परिसर में जेल अदालत–सह–कानूनी जागरूकता शिविर–सह–चिकित्सा जांच शिविर का सफल आयोजन 21.12.25 को पूर्वाह्न 11:00 बजे किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम में श्री Tausif Meraj, learned सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सरायकेला-खरसावां; श्री सत्येंद्र कुमार महतो, अधीक्षक, जिला जेल, सरायकेला; चिकित्सा पदाधिकारीगण, लीगल एड डिफेंस काउंसिल (LADCs), जेलर, जिला जेल के अधिकारी-कर्मचारी, न्यायालय कर्मी, विधि प्रशिक्षु (लॉ इंटर्न) एवं बड़ी संख्या में जेल बंदी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री Tausif Meraj ने बताया कि जेल अदालत का आयोजन प्रत्येक माह प्रायः तीसरे रविवार को किया जाता है, जिसका उद्देश्य बंदियों को त्वरित न्याय, कानूनी सहायता और जागरूकता उपलब्ध कराना है। उन्होंने माननीय उच्च न्यायालय, झारखंड, रांची के निर्देशों का उल्लेख करते हुए बताया कि जेल अदालत की अवधारणा किस प्रकार विकसित हुई तथा किस उद्देश्य से इसे लागू किया गया है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार जेल अदालत के साथ-साथ चिकित्सा जांच शिविर का आयोजन किया जाना आवश्यक है, ताकि बंदियों के स्वास्थ्य परीक्षण, परामर्श एवं उपचार की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके। चिकित्सा पदाधिकारियों द्वारा बंदियों की स्वास्थ्य जांच कर आवश्यक परामर्श एवं दवाएं प्रदान की गईं।
Sri Meraj ने उपस्थित बंदियों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा प्रदान की जाने वाली निःशुल्क कानूनी सहायता के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर, निरुद्ध व्यक्ति, महिलाएं, बच्चे, अनुसूचित जाति/जनजाति, दिव्यांग एवं अन्य पात्र व्यक्ति डालसा से निःशुल्क अधिवक्ता, कानूनी परामर्श एवं सहायता प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही, उन्होंने कानूनी सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया को सरल शब्दों में समझाया और बंदियों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक किया।
कार्यक्रम के दौरान जेल प्रशासन एवं विधिक सेवा प्राधिकरण के बीच समन्वय और सहयोग की सराहना की गई। अधीक्षक, जिला जेल, सरायकेला ने ऐसे आयोजनों को बंदियों के मानसिक, कानूनी एवं शारीरिक कल्याण के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री तौसिफ मेराज, learned सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सरायकेला-खरसावां ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत (Principle of Natural Justice) पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने उपस्थित बंदियों को सरल भाषा में समझाया कि भारतीय न्याय प्रणाली का मूल आधार प्राकृतिक न्याय है, जिसके अंतर्गत “कोई भी व्यक्ति बिना सुने दंडित नहीं किया जाएगा” तथा “न्याय न केवल किया जाना चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखाई भी देना चाहिए” जैसे सिद्धांत शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि न्यायालय यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक पक्ष को सुनवाई का पूरा अवसर मिले, निष्पक्षता बनी रहे और किसी के साथ अन्याय न हो। इस संदर्भ में उन्होंने माननीय सर्वोच्च न्यायालय एवं विभिन्न माननीय उच्च न्यायालयों के महत्वपूर्ण निर्णयों का उल्लेख किया, जिनमें प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों को सर्वोपरि मानते हुए उन्हें संवैधानिक अधिकारों का अभिन्न अंग माना गया है। उन्होंने कहा कि इन न्यायिक निर्णयों के माध्यम से यह स्थापित किया गया है कि यदि किसी मामले में प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन होता है, तो वह आदेश न्यायालय द्वारा निरस्त किया जा सकता है।
श्री Meraj ने यह भी बताया कि जेल अदालतों का उद्देश्य केवल मामलों का निष्पादन नहीं, बल्कि बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों से अवगत कराना भी है, ताकि वे न्यायिक प्रक्रिया को समझ सकें और अपने अधिकारों का विधिसम्मत उपयोग कर सकें। उन्होंने बंदियों को आश्वस्त किया कि न्यायालय एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण उनके अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।यह उल्लेखनीय है कि जेल में बंद एक बंदी के नाबालिग होने की आशंका जताई गई थी। लीगल एड डिफेंस काउंसिल (LADC) की सहायता से मामला माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां न्यायालय ने संबंधित बंदी को नाबालिग घोषित किया।कार्यक्रम के अंत में उन्होंने महिला वार्ड का भी दौरा किया और वहां की महिला कैदियों से बातचीत की।यह आयोजन न्याय तक पहुंच, कानूनी सशक्तिकरण और स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिससे बंदियों में सकारात्मक संदेश गया और उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ी।
