खरसावां में मेरा रेशम, मेरा अभिमान पर प्रशिक्षण,
80 किसानों को बताए गए रोग प्रबंधन व पौधारोपण के तरीके,
तसर उत्पादन ग्रामीण के लिए आमदनी स्रोत है-नीतीश
kharsawan
खरसावां प्रखंड के सुदूरवर्ती क्षेत्र हुडागंदा और कारोसाई में केंद्रीय रेशम बोर्ड व अग्र परियोजना केन्द्र खरसावां के संयुक्त तत्वावधान में मेरा रेशम, मेरा अभिमान के तहत 80 किसानों को रोग प्रबंधन विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। हुडागंदा और कारोसाई के 40-40 किसानों को रोग प्रबंधन व पौधारोपण के तरीके बताए गए।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपस्थित खरसावां अग्र परियोजना केन्द्र पदाधिकारी नीतीश कुमार ने कहा कि तसर उत्पादन ग्रामीण समुदायों के लिए आय और रोजगार का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। जिससे उन्हें सीधे कोकून उत्पादन, धागे निकालने, बुनाई और अन्य संबंधित गतिविधियों में शामिल होने का मौका मिलता है।

यह आदिवासी समुदायों की पारंपरिक आजीविका का हिस्सा है और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने, शहरी पलायन रोकने और सतत विकास को बढ़ावा देने में मदद करता है। जबकि केंद्रीय रेशम बोर्ड नगरी के वैज्ञानिक डॉ. अपूर्णा कोप्पारपुर ने कहा कि मेरा रेशम, मेरा अभिमान अभियान देशभर के 100 जिलों में बताया जा रहा है। इसमें झारखंड के पांच जिलं शामिल है। जिसमें झारखंड के सरायकेला-खरसावां, पश्चिमी सिंहभूम, गोडडा, देवघर, गिरिडीह जिला शामिल है। उन्होने किसानो को बताया कि यह एक विशेष तकनीक कार्यक्रम है, जिसमें वैज्ञानिक और तकनीकी कर्मचारी सीधे किसानों के खेत पर पहुंच कर नई तकनीक अच्छे बीज और सही पालन पोषण की जानकारी दिया गया। इस दौरान मुख्य रूप से खरसावां अग्र परियोजना केन्द्र पदाधिकारी नीतीश कुमार, वैज्ञानिक डॉ. अपूर्णा कोप्पारपुर, वैज्ञानिक डॉ. सुमित्रा दास, प्रोजेक्ट सहायक डोमन कुंभकार, कुलुराम पाडेया, लाल मोहन टूडू, राजकिशोर महतो, सहित काफी संख्या में किसान व ग्रामीण उपस्थित थे।
