खरसावां-कुचाई क्षेत्र मां दुर्गा की भक्ति में डूबा,
भक्तों के मन मे श्रद्वा का भाव, हाथ में पूजा की थाली
भक्तों में सिर्फ निकला माता शेरावाली का नाम
खरसावां
भक्तों के मन मे श्रद्वा का भाव और हाथ में पूजा की थाली। जुबान में कुछ निकले तो सिर्फ माता शेरावाली का नाम। मां अंबे की भक्ती के सागर में डुबा खरसावां-कुचाई में नवरात्र सप्तमी के दिन पूजा पंडाल का कपाट खुलने के बाद कुछ ऐसा ही नजारा दिखा। सब तरह सिर्फ नारी भक्ति की महिमा दिखी। पुरूष हो या महिला सभी नारी के उस अनन्य रूप के आगे नतमस्तक दिखे। जिसमें सबको जन्म दिया है।

सुबह पारंपरिक गाजे बाजे के साथ ढाक की धुन पर पुजारी द्वारा कलश यात्रा निकाली गई। नदी से विधिवत पूजा के बाद कलश को पूजा स्थल तक लाया गया। जंहा कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा की पूजा सभी पंडालो में शुरू हो गयी। प्रतिमाओं में विधि विधान से प्राण प्रतिष्ठा की गयी। इसी के साथ शुरू हो गया पंडालो में श्रद्वालुओ के रंेले का आने की सिलसिला। दुनिया की नई गति कहे या झझवाती की नई डगर। आज मां भगवती की आराधना असुरमर्दिनी के रूप मे अधिक हो रही है। मां की पूजा की गई।

श्रद्वालुओ ने किया सुख शांति की प्रार्थना
खरसावां के बजारसाही स्थित दुर्गा मंदिर में सरकारी पूजा समिति, सेवा संघ पूजा समिति तलसाही, श्री श्री दुर्गा पूजा समिति बेहरासाई, श्री श्री ठाकुरबाडी पूजा समिति आमदा, ज्ञान मंदिर पूजा समिति नयाबजार आमदा, रेलवे कॉलोनी दुर्गा पूजा समिति राजखरसावां एवं श्री श्री दुर्गा पूजा समिति बडासाई खरसावां स्थित दुर्गा मंदिर में भक्तो की भीड उमडी, भक्तो ने पूरे विधि विधान के साथ पूजा अर्चना की और भोग प्रसाद का चढावा चढा कर सुख शांति एवं समूदि के लिए प्रार्थना की।

आमदा में बच्चियों ने निकाली कलश यात्रा
खरसावां में नवरात्र सप्तमी के दिन श्री श्री आमदा ठाकुरबाडी पूजा समिति के द्वारा छोटी-छोटी बच्चियों के द्वारा भव्य कलश यात्रा निकाला गया। खरसावां के आमदा स्थित महांती तलाब से पारंपरिक तरीके से पूजा-अर्चना कर कलश यात्रा निकाली गई। जो मां दुर्गा के जयकारों के साथ विभिन्न मांगो से होते हुए पूजा स्थल पर पहुची। जहां कलश की स्थापना कर पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान महासप्तमी पर आरती, पृष्पाजंली एवं प्रसाद वितरण किया गया।
