पावन देवस्थापन एकादशी के साथ शुरू हुआ 5 दिनों का आकाशदीप परंपरा; पितरों को दिखाया गया स्वर्ग लोक का रास्ता,
Seraikella
सरायकेला। पवित्र कार्तिक महीने के अंतिम पांचवें दिन पंचक पर आकाशदीप की परंपरा की महिमा रही है। जिसमें देवोत्थान एकादशी से प्रारंभ कर कार्तिक पूर्णिमा तक विधि विधान के साथ आकाशदीप परंपरा निभाते हुए पितरों को स्वर्ग लोक का रास्ता दिखाया जाता है। उड़ीसा के सभी घरों में निभाई जाने वाली उक्त परंपरा के तहत सरायकेला में भी इसका पालन किया जाता है।

जिसमें खरकाई नदी तट पर शाम के समय आकाशदीप जलाकर परिवारों द्वारा अपने पितरों को मोक्ष का रास्ता दिखाया जाता है। इसका शुभारंभ रविवार से किया गया। जानकारी कार्तिक परीक्षा बताते हैं कि पितृ पक्ष के दौरान अपने पूर्वज पितर धरती पर आते हैं। और पूरे कार्तिक महीने हमारे साथ रहते हैं। कार्तिक महीने के अंत में उन्हें आकाशदीप के जरिए पुणे स्वर्ग का रास्ता दिखाया जाता है। इसके तहत कार्तिक माह में पूजा अर्चना के पश्चात मिट्टी की छोटी हांडी में मिट्टी के जलते हुए बड़े दीये को रख दिया जाता है। और हांडी को 8 से 10 फीट की ऊंचाई पर बस की बाली में बांध दिया जाता है। सरसों के तेल से भारी दीप रात भर जलती रहती है। मान्यता है कि दीये की रोशनी से पितरों को उनके गंतव्य स्थान जाने में सहूलियत होती है। दीपक को जलाते हुए प्रार्थना किया जाता है कि यह आकाशदीप सभी रूपों और ब्रह्मांड के स्वामी भगवान दामोदर को अर्पित करता हूं, जो भगवान के सबसे प्रिय हैं।
