कार्तिक पूर्णिमा पर सरायकेला में जीवंत होगी “बोईतो बंदाणों” की प्राचीन उत्कलीय परंपरा; श्री जगन्नाथ सेवा समिति कर रही तैयारी, अपनों की सकुशल घर वापसी और परिवार के समृद्धि के लिए श्रद्धालु केले की काष्ठ की हस्त निर्मित नौका में दीप प्रज्वलित कर नदी जल में करेंगें प्रवाहित
Seraikella
सरायकेला। उत्कलीय संस्कृति की प्राचीन परंपरा “बोईतो बंदाणों” धार्मिक पर्व होने के साथ-साथ ओड़िया संस्कृति एवं परंपरा की आत्मा हैं। पवित्र कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि पर उक्त आयोजन हर घर में खुशहाली एवं शुभागमन का संदेश माना जाता है। हालांकि पूरा कार्तिक पवित्र मास ही जगन्नाथ संस्कृति में महान माना गया है। जिसमें समाज में पवित्रता और नारी श्रद्धा इसके प्रतीक रहे हैं। पूरे कार्तिक महीने के प्रत्येक दिवस पर तड़के प्रात: व्रती महिलाएं नदी स्नान कर महाप्रभु श्री जगन्नाथ की विशेष रूप से राई दामोदर की आराधना करती हैं। धूप, दीप और बालुका पूजा कर पूरे कार्तिक महीने आराधना करती हैं। और कार्तिक पूर्णिमा पर इसे “बोईतो बंदाणों” के तौर पर मनाती हैं।
जाने प्राचीन उत्कलीय परंपरा “बोईतो बंदाणों” उत्सव को:-
कार्तिक मास के पूर्णिमा तिथि को प्राचीन उत्कलीय परंपरा के तहत घर की महिलाएं और युवतियां “बोईतो बंदाणों” उत्सव श्रद्धा भाव के साथ मनाती हैं। जिसमें तड़के प्रातः बेहद ही शुद्धता के साथ नदी स्नान कर महाप्रभु श्री जगन्नाथ की आराधना करते हुए बनाए गए केले के वृक्ष की काष्ठ से हस्त निर्मित सुसज्जित आकर्षक नौका में दीपक प्रज्वलित कर उसे नदी की जलधारा के साथ प्रवाहित करती हैं। परिवार की सुख समृद्धि के लिए इसमें परिवार के पुरुष वर्ग भी शामिल होते हैं। इसके पीछे मान्यता रही है कि प्राचीन काल में तत्कालीन उत्कल क्षेत्र के व्यवसायी दूर देशों में जैसे जावा, सुमात्रा एवं माली जैसे देशों में व्यापार के लिए जाया करते थे। कार्तिक पूर्णिमा के पावन अवसर पर उनके परिवार द्वारा उनके सकुशल घर वापसी और अच्छे व्यापार कर वापस लौटने की मंगल कामना करते हुए “बोईतो बंदाणों” मनाया जाता था। वर्तमान में भी उक्त प्राचीन परंपरा को जीवंत स्वरूप में सभी अपने परिवार के कुशल छेम के साथ-साथ सुख शांति एवं समृद्धि की कामना के लिए “बोईतो बंदाणों” उत्सव श्रद्धा भाव के साथ मनाते हैं।
राष्ट्र की समृद्धि एवं खुशहाली की कामना के साथ श्री जगन्नाथ सेवा समिति मना मनाएगी उत्सव:-
प्राचीन उत्कलीय परंपरा “बोईतो बंदाणों” उत्सव के लिए श्री जगन्नाथ सेवा समिति सरायकेला द्वारा विशेष तैयारी की जा रही है। इसके तहत जहां नदी घाटों पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रकाश सज्जा की व्यवस्था की जा रही है। वही राष्ट्र के सुख समृद्धि एवं खुशहाली के लिए बोईतो बंदाणों के अवसर पर नौका प्रवाहित करने की तैयारी की जा रही है। जिसके लिए विशेष रूप से आकर्षक सज्जा के साथ श्रीमती रीना साहू, आयुष कुमार साहू एवं दुखु राम साहू द्वारा 4:50 फीट लंबा और 2 फीट चौड़ा नौका तैयार किया जा रहा है। जिसे कार्तिक पूर्णिमा की तिथि पर प्रातः खरकाई नदी में जलधारा के साथ दीपक प्रज्वलित करते हुए प्रवाहित किया जाएगा।
