कुचाई के चम्पद में मना 7 वॉ वनाधिकार पत्थरगाडी
स्थापना दिवस, 27 एकड़ वनभूमि पर वनाश्रितों का सामुहिक दावा,
जंगल बचाने का संकल्प सामुहिक रुप से लेना चाहिए-सोहन,
kuchai
कुचाई प्रखण्ड के अर्न्तगत चम्पद में आदिवासी परंपरानुसार 7 वाँ वनाधिकार पत्थरगाडी स्थापना दिवस हर्साेल्लास के साथ मानाया गया। इस दौरान विभिन्न्ा गांवो से पहुचे वनाश्रितों ने आदिवासी भेष-भूषा में नारा लगाते हुए पारपंरिक रीति रिवाज व नृत्य के तहत जुलूस निकालकर पत्थरगाड़ी स्थल तीन मोड़ चौक तक पहुचे और विधि विधान से पूजा अर्चना कर वनाधिकार पत्थरगाड़ी स्थापना दिवस मनाया। साथ ही पैड़-पोधे, पशु-पक्षी, वन, पहाड़, फल-फूल, जीविकोपार्जन व वन संरक्षण की रक्षा के लिए सामुहिक रूप से संक्लप लिया।

इस दौरान 27 एकड़ वनभूमि पर वनाश्रितों का सामुहिक दावा किया गया। मौके पर रांची आईसीएफजी सदस्य सोहनलाल कुम्हार ने कहा कि जंगल अपना है। जंगल विरासतों का भाण्डार है। जंगल जीविकास्रोतें भी है। जंगल बचाने का संकल्प सामुहिक रुप से लेना चाहिए। जबकि विधायक प्रतिनिधि धर्मेन्द्र सिंह मुंडा ने कहा कि जंगल के बिना आदिवासियों का जीवन अधूरा है। जंगल के कारण ही समय पर बर्षा होती है, शुद्ध हवा मिलती है, कफी मात्रा में वनोपजें मिलती है जिसे अधिक आमदानी होती है।

ओखोरी प्रवास ने कहा कि अंग्रेज जंगल लुटने आया था। भारत आजाद के बाद जंगल वन विभाग के पास था। अब वनाधिकार कानून 2006 आ गया है। तुसार क्रांति कुम्भकार ने कहा कि अब जंगल ग्राम सभा के जिम्मे पर आ गया है। जंगलों का संरक्षण कर जैवविविधताओं को भी बचाया जाये। जंगल का संरक्षण से परिस्तिथियतंत्र संतुलन वना रहता है तथा वनाश्रितों के आय में भी बृद्धि होती है। कुन्दन गुप्ता ने वनोपजो का बाजार कैसै करना है तथा वनोपजो के विपणन पर सहयोग करने का वचन दिये।

सुखराम मुंडा ने आवाहन किया कि सभी ग्राम सभाएँ जंगल बचाने में लग जाएँ ताकि भविष्य पिड़ियों को भी शान्ति और सुख सुविधा मिलता रहे। कार्यक्रम का संचालन भरत सिंह मुंडा ने किया। इस दौरान मुख्य रूप से सोहनलाल कुम्हार, धर्मेन्द्र सिंह मुंडा, ओखोरी प्रवास, कुन्दन गुप्ता, सुखराम मुंडा, भरत सिंह मुंडा, सोंगड़ा मुंडा, मुन्ना सोय, गोपाल सिंह मुण्डा, दामु मुण्डा, तुलसी मुण्डा, रामकृष्ण मुण्डारी, वनवारी लाल सोय, तुसार क्रांति कुम्बकार, साधो सरदार, करम सिंह मुंडा, सितंबर गुन्दुवा, पांडु मुंडा, कारु मुंडा, विक्रम मुण्डा, कुजरी मुंडा, रावकान बांकिरा, नोरेश मुंडा सहित चम्पत, रायसिंहदिरी, बड़ाबाण्डीह, छोटाबाण्डी, छोटासेगोई, बड़ासेगोई, बाड़ेडीह, पुनीबुढी़, जोड़ासरजोम, दामादिरी, डांगो, भुरकुण्डा, रामायसाल, सेरेंदा, छोटचाकड़ी से वनाश्रित व ग्रामीण उपस्थित थे।
