खरसावां के कुम्हारसाही के माता पाउडी के शक्ति
पीठ पर विधि-विधान से हुई नुआखाई वार्षिक जंताल पूजा,
की गई आराधना, चढाया गया नयी फसल का भोग
kharsawan
खरसावां के कुम्हारसाही स्थित माता पाउडी के शक्ति पीठ में वार्षिक जंताल पूजा श्रद्वा व उल्लास के साथ संपन्न हुआ। खरसावंा के प्रसिद्व शक्ति पीठ का विशेष महत्व है। जंताल पूजा की शुरूआत देउरी सुकरा नायक के द्वारा माता पाउडी की आराधना के साथ किया गया। विधि-विधान से पूजा-अर्चना के दौरान श्रद्वालुओं ने पहली फसल भगवान को अर्पित किया गया। साथ ही क्षेत्र की सुख शंाति व अच्छी फसल के लिये पूजा अर्चना की। साथ ही श्रद्वालुओ ने माता के दरबार में कई मन्नते की।

इसके पश्चात माता को प्रसन्न करने के लिये बकरा व भेडा की बलि दी गई। प्रशासन की और से भी पूजा के लिये विशेष व्यवस्था की गयी थी। खरसावां का वार्षिक जंताल पूजा यहा की प्रमुख पूजा है। मां पाउड़ी को माता भगवती का एक रूप माना जाता है। यहां प्रत्येक सप्ताह गुरूवार को माता पाउड़ी के पीठ पर पूजा की जाती है। जंताल पूजा की यह पंरपरा 13 वीं सदी से पुरानी है। जो आज भी कायम है। उल्लेखनीय है कि पूर्व में इस पूजा का आयोजन राजपरिवार की ओर से किया जाता था। वर्ष 1949 से पूजा का पूरा खर्च राज्य सरकार वाहन करती है। इस पूजा-अर्चना होने के पश्चात ही इस वर्ष के धान के फसल से चावल बना कर खाया जाता है।
पाउडी पूजा में प्रत्येक सप्ताह पांच-पांच हजार होती है खर्च
खरसावां के कुम्हारसाही स्थित माता पाउडी स्थल में पूजा-अर्चना पर झारखंड सरकार के द्वारा किया जाता है। वर्ष 1949 से सरकारी स्तर पर पूजा-पंरपरा निभाई जाती है। सरकारी स्तर पर पांच-पांच हजार रूपये खर्च करके यहां प्रत्येक सप्ताह गुरूवार को माता पाउड़ी के पीठ पर पूजा की जाती है। जिसपर वार्षिक 2.60 लाख रूपये सरकारी खर्च की जाती है।
खरसावां मे राजवाड़ी काल से होती है पूजा
खरसावां के कुम्हारसाही स्थित माता पाउडी स्थल के सरकारी वार्षिक जंताल पूजा के देउरी सुकरा नायक ने बताया कि खरसावां के कुम्हारसाही स्थित माता पाउडी के शक्ति पीठ में वार्षिक जंताल पूजा की पंरपरा 13 वीं सदी से पुरानी है। खरसावां के तत्कालीन राजा के द्वारा वर्ष 1356 से मां पाउड़ी पूजा किया जाता है। देश की आजादी के बाद वर्ष 1949 से सरकारी स्तर से पूजा-अर्चना की जा रही है।
