कुचाई के कुदाडीह ग्राम में मुण्डारी खूंटकट्टीदारी
मालिकाना अधिकार को लेकर अंचल अधिकारी को सौपा ज्ञापंन,
खेवटदारों ने राजस्व जमा करने के अनुमति की मांग,
kuchai
कुचाई प्रखंड के कुदाडीह ग्राम के मुंडारी खूँटकट्टीदारों का मुण्डारी खूँटकट्टीदारी मालिकाना को लेकर कुचाई अचल अधिकारी सुषमा सोरेन को एक ज्ञापन सौपकर खेवटदारों ने राजस्व जमा करने के अनुमति की मांग की गई। सीओ को सौपे गए ज्ञापंन में कहा गया है कि कुचाई प्रखण्ड अन्तर्गत कुल 39 मौजा मुण्डारी खूँटकट्टी अभिधृति ग्राम हैं। ईन ग्रामों के कुल 50019.13 एकड़ जंगल-जमीन है। 39 मौजा के अन्तर्गत कुदाडीह मौजा भी विगत पुनारावृति भू-सर्वेक्षण बर्ष 1927-28 के खेवट-खातियानो पर ईन्द्राजानुसार मुण्डारी खूँटकट्टी अभिधृति अधिकार व्यवस्था है।

मौजा कुदाडीह का कुल क्षेत्रफल 1439.78 एकड़ जंगल तथा खेती लायक जमीन है जिन पर मुण्डारी खूँटकट्टीदारों के कब्जे में 1861 ई०सन के पूर्व से रहा है। ईस ग्राम में मुण्डाओं का खेवट 5/1 से 5/12 तक वना है तथा खेवट नम्बर 5/13 में 5/1 से 5/12 तक के खूँटदारों को शामिलात मालिकाना के रुप में दर्ज किया गया है। खेवटदारों का कहना है कि 1902 में मौजा कुदाडीह, थाना 9 को लगान वसूली के वास्ते तमाड़ थाना अन्तर्गत मौजा तड़ाई के मानकी नारायण ने राढ़गाँव के राजबली को लीज दिया था। लीज लेने के बाद वे तड़ाई के मालिक को माल व शेष जमा नहीं कीये जिसके कारण पुनः तड़ाई मानकी ने आफति कीये लेकिन छल- बल करके 1927-28 का पुनारावृति भू-सर्वेक्षण मे खेंवट नम्बर 4 में अपना नाम दर्ज करवा लिया। ये गतिविधि राजतंत्र यानी जमीनदारी प्रथा के समय किया गया था। पूर्वज में कुदाडीह के खेंवटदार तढा़्ई मानकी को माल व शेष जमा करते थे। लीज लेने के बाद राजबल्ली ने कभी भी कुदाडीह नहीं आया और न माल व शेष ही वसूली करने आया। ये मौजा कुदाडीह का वासिन्दा भी नहीं है तथा वे आदिवासी सामुदायिक के भी नहीं है। खेंवटदारों ने तर्क दिया है कि छोटानागपुर कास्तकारी अधिनियम 1908 के धारा 8 के मुताबिक मुण्डारी खूँटकट्टी अभिधारी का कोई भाग रैयती वन्दोवस्ती या मोकर्रारी पट्टा केवल मुण्डारी सामुदाय को ही अन्तरण किया जा सकेगा। ये मौजा ईस धारा के मुताबिक कुदाडीह, पूर्वज से मुण्डारी खूँटकट्टीदारो के कब्जे में रहा है। सीएनटी एक्ट 1908 के धारा 46 में उल्लेखानुसार मुण्डारी खूँटकट्टी अभिधृति के किसी भी भू-भाग को बिक्रय, दान या संविदा करार द्वारा अन्तरण बिधिमान्य न होगा। धारा 14 पर उपबंधितानुसार मुण्डारी खूँटकट्टी व्यवस्था को अधिग्रहण किया जाना विधिमान्य नहीं है। धारा 240 (1) पर उल्लेखानुसार मुण्डारी खूँटकट्टी अभिधृति का कोई भाग को न्यायलय के डिक्री या आदेश के निस्पादन में बिक्रय द्वरा अन्तरण न होगा। इस ग्राम के खेवटदार इस समय अंचल कुचाई में माल व शेष जामा करना चाहते है तथा मुण्डाओं से माल व शेष स्वीकार करने के लिये आर्जी दिये। जबकि भारत आजाद होने के बाद भी आज तक ईस राजस्व ग्राम से सरकार के खजाना में राजस्व नहीं मिला है, ईससे सोचा जा सकता है कि अंचल से जिला तक के पदाधिकारी कितने गैरजिम्मेदराना है। संभवताः अज्ञानताः वस वे अंचल को माल व शेष जमा नहीं कर रहे थे जिसके कारण बच्चे-बच्चियों तथा आम ग्रामीणों के आधार, जाति तथा आवासीय नहीं वन पा रहा है जिसके कारण कई प्रकार के सरकारी सुविधाओं से बंचित हैं। आईसीएफजी के केन्द्रीय सोहन लाल कुम्हार, भरत सिंह मुण्डा, धर्मेन्द्र सिंह मुण्डा, करम सिंह मुण्डा, आदि के उपस्थिति में ज्ञापन सौपा गया। ज्ञापनं में सन्दिर मुण्डा, सामराय मुण्डा, पौलुस मुण्डा, सावन मुण्डा, तिरबोन मुण्डा, सनिका मुण्डा, बिरसिंह मुण्डा, लखन मुण्डा, जितेन्द्र मुण्डा, बुसु मुण्डा, सागर मुण्डा, सुखराम मुण्डा, राड़ासी मुण्डा, साऊ मुण्डा, हर सिंह मुण्डा, गोन्डा मुण्डा, काड़िया मुण्डा, मरकुस मुण्डा, जुसफ मुण्डा, रिजा मुण्डा, बोंज मुण्डा, दसा मुण्डा, सुली मुण्डा, बुधु मुण्डा, ख्रीस्टोचित, मुण्डा, डोमन मुण्डा, रागु मुण्डा, याकुब मुण्डा, जुसब मुण्डा, साऊ मुण्डा, बिरसा मुण्डा, लाका मुण्डा, गोमेया मुण्डा, जुनस मुण्डा, चोण्डे मुण्डा, मोदमसीह मुण्डा, दानियल मुण्डा, नथनियल मुण्डा, तथा नातान मुण्डा ने हस्ताक्षर थे।
