पत्रकार नविन प्रधान को मिली डॉक्टोरेट की मानद डिग्री
Seraikella
सरायकेला: पत्रकार एवं शिक्षाविद नविन प्रधान को उच्च शिक्षा एवं समाज में अनेक सामाजिक कार्यों के लिए एम. बी. आर फाउंडेशन तथा मैजिक एंड आर्ट्स यूनिवर्सिटी दिल्ली फरीदाबाद ने डॉक्टरेट अवार्ड से सम्मानित किया है। लाइव सम्मान समारोह आगामी 13 अगस्त को फरीदाबाद में आयोजित हुवी। उल्लेखनीय है कि एम एंड ए यूनिवर्सिटी द्वारा अवार्ड उच्च शिक्षा साहित्य तथा समाजसेवा के क्षेत्र में दिया जाता है। नविन प्रधान ने अपनी मास कॉम की पढ़ाई दिल्ली आई आई एम एम कॉलेज से पूरी की है और आगे की एम एंड ए यूनिवर्सिटी फरीदाबाद से पत्रकार नविन प्रधान अनेक राष्ट्रीय मिडिया संस्थाओं से जुड़े रहे हैं। संचार सिद्धांतों, मीडिया अनुसंधान विधियों, संचार के सामाजिक-सांस्कृतिक-राजनीतिक प्रभाव, और पत्रकारिता, विज्ञापन, जनसंपर्क, डिजिटल मीडिया आदि विभिन्न मीडिया क्षेत्रों के महत्वपूर्ण मुद्दों पर शोध करते रहे। उनके कोविड के समय जब लोग किसी अपने से मिलने से दूर भागते थे तब इन्होंने रिपोर्टिंग के द्वारा कई लोगो की मदद कर कई खबरें प्रकाशित हुवी जिनकी काफी सराहना मिली थी।
March 11, 2026 2: 43 am
Breaking
- सरायकेला में प्रखंड स्तरीय आयुष चिकित्सा शिविर का आयोजन, सैकड़ों लोगों ने उठाया लाभ,
- सरायकेला में नुक्कड़ नाटक कर जन-जन को आयुष अपनाने हेतु किया प्रेरित, क्रॉनिक बीमारियों को जड़ से मिटाने की जो शक्ति आयुर्वेद में है वह किसी अन्य चिकित्सा पद्धति में नहीं- डॉ पूनम कुमारी
- खरसावां में मां बसंती पूजा की तैयारी को लेकर बैठक, 23 मार्च से शुरू होगा चार दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान, विजया दशमी पर ब्राह्मण बच्चों के लिए होगा सामूहिक व्रत उपनयन संस्कार,
- झारखंड अधिविद्य परिषद (जैक) बोर्ड की नवीं कक्षा के हिंदी प्रश्न पत्र के लगभग 33 प्रतिशत प्रश्न आउट ऑफ सिलेबस
- खूंटपानी में कोल्हान रक्षा संघ का महासम्मेलन, हो भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग, हक और अधिकारों की रक्षा के लिए सजगता जरूरी-डिंबार जोको,
- महिला दिवस पर नगर पंचायत अध्यक्ष ने विधायक सविता महतो से की शिष्टाचार मुलाकात
- खरसावां के आन्नदडीहु, जोजोडीह, दलाईकेला व कस्तृरबॉ में नुक्कड नाटक के तहत आयुष पद्धति अपनाने के लिए दिलाई शपथ, बताया आयुष पद्धति न केवल रोगों के उपचार में है सहायक,
- कुचाई के जिलिंगदा में सरहुल पर्व की तैयारी को लेकर बैठक, 21 मार्च को मनाया जायेगा सरहुल, सरहुल केवल एक पर्व नहीं बल्कि प्रकृति, संस्कृति और समाज के आपसी संबंधों का प्रतीक है
