खरसावां के दितसाई में धुमधाम मना इंद्रोत्सव,
पारंपरिक विधि-विधान से भगवान इंद्रदेव की पूजा-अर्चना
कर अच्छी फसल और सुख-समृद्धि की कामना
kharsawan
खरसावां के दितसाई स्थित इंद्र मैदान में गुरूवार को भगवान इंद्र की आराधना का पर्व इंद्रोत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। राज पुरोहित अंबुजाख्य आचार्य ने भगवान इंद्रदेव की विधिवत पूजा-अर्चना की। श्रद्धालुओं ने पारंपरिक विधि-विधान से भगवान इंद्रदेव की पूजा-अर्चना कर अच्छी फसल और सुख-समृद्धि की कामना की गई। साथ ही पूजा के बाद मैदान में परंपरिक रूप से वैदिक मंत्रोच्चार के साथ करीब 25 फीट ऊंचा इंद्र छाता गाड़ा गया। पुजारी ने बताया कि वर्ष के देवता इंद्र बारिश देते हैं और धरती को हरियाली व धन्य-धान्य से संपन्न कर देते है। इसीलिए उनकी कृपा के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने और अगले बरस अच्छी बारिश की देने के लिए उनकी विशेष पूजा पारंपरिक रिवाजों के अनुसार किया जाता है। खरसावां में इंद्र की पूजा सह मेला परंपरा काफी पुरानी है। पूजा-अर्चना के स्थानीय ग्रामीणों का नृत्य दल ने नाच गान प्रस्तुत किया। मांदर की थाप पर महिला व पुरूषों ने उत्सव मनाया। इंद्रोत्सव देवराज इंद्र की आराधना का पर्व है।

देवराज इंद्र की आराधना का पर्व
इंद्रोत्सव को देवराज इंद्र के आराधना का पर्व के तौर पर मनाया जाता है। अच्छी फसल व सुख-समृद्धि की कामना लिए उक्त पूजा किया गया। मान्यता है कि इंद्रोत्सव के आयोजन से भगवान प्रशन्न होते हैं और अच्छी फसल होती है। क्षेत्र में खुशहाली बनी रहती है। खरसावां के दितसाई में राजा के समय से शुरू हुई इंद्र पूजन की परंपरा आज भी कायम है। रजवाड़े के समय से ही यहां पूरी सादगी के साथ इंद्रोत्सव का आयोजन होता है।
सादगी के साथ की गई पूजा
सादगी के साथ इंद्र छाता गाड़कर पूजा की गई। पूजा के बाद लोगों में प्रसाद का वितरण किया गया। इस दौरान मुख्य रूप से राज पुरोहित अंबुजाख्य आचार्य, हरिश चंद्र आचार्य, जीतवाहन मंडल, सपन आचार्य, संजीव मंडल, अनिल मंडल, हरि मंडल, समीर आचार्य, दीपक मंडल, बलराम दे, अरविंद मंडल, आशीष दे, कुंज बिहारी मंडल, रंजीत दे, मीकू मंडल, रमेश मंडल, गुरूवां मंडल, लक्ष्मण मंडल सहित दितसाई, बदिराम, चिलकू, गोढपुर सहित विभिन्न् गांव के ग्रामीण व श्रद्धालु उपस्थित थे।
