जिला स्तरीय सप्तशक्ति संगम कार्यशाला संपन्न, माता में आत्मनिर्भरता के साथ-साथ धन, धैर्य , वाणी ,कुल ,क्षमता आदि गुण भी होना जरूरी है-रंजना सिंह
Seraikella
सरायकेला ।सरस्वती शिशु मंदिर उच्च विद्यालय, सरायकेला में सप्त शक्ति संगम के तहत जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसमें सरायकेला जिला के चांडिल और सरायकेला संकुल से कुल 50 दीदियों ने भाग लिया। मुख्य अतिथि एवं वक्ता के रूप में उपस्थित झारखंड प्रांत के सप्तशक्ति संगम की संयोजिका तथा भूलीनगर धनबाद की प्रभारी प्रधानाचार्या रंजना सिंह दीदी जी । इन्होंने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि माता में आत्मनिर्भरता के साथ-साथ धन, धैर्य , वाणी ,कुल ,क्षमता आदि गुण भी होना जरूरी है । अगर एक दूसरे के साथ कदम से कदम मिलाकर चलें तो हमारा घर के साथ-साथ समाज और देश का भी विकास होगा ।

उन्होंने आगे कहा कि महिलाएं उन सभी कार्यों को कर सकती हैं जिसे एक पुरुष कर सकता है ।यह कार्यक्रम मातृशक्ति के जागरण का है – माता कैसी चाहिए? बहनों को कैसे रहना चाहिए? इस कार्यशाला का मूल उद्देश्य ही यही है कि आज द्रुत गति से पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव होने के कारण माता बहनों में परिवर्तन आ रहा है । आज राष्ट्र को मां जीजाबाई जैसे मातृत्व देने वाली, भगिनी निवेदिता जैसे भारत भक्त, मीरा जैसी कृष्णा भक्ति, अहिल्याबाई जैसे कर्तव्य परायण नारी चाहिए जो राष्ट्र का नवनिर्माण कर भारत को परम वैभव तक पहुंचाने में कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़े। इस कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री पार्थ सारथी आचार्य, कोषाध्यक्ष श्री प्रसाद महतो जी और उप प्रधानाचार्य श्री तुषार कांत पति जी उपस्थित थे।इस कार्यशाला का उद्देश्य एक करोड़ माता को जोड़ना है जिसमें पूर्व छात्र एवं समाज की माताएं होगी।

इसकी प्रस्तावना को रखते हुए सरायकेला विद्यालय की शालिनी नंदा दीदी ने बताया कि संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने पर संगठन द्वारा माताओं को अपनी शक्ति की पहचान करने हेतु यह कार्यशाला रखी गई है । जिसमें उपस्थित दीदी इस कार्यशाला में प्रशिक्षण प्राप्त कर अपने विद्यालयों में माताओं के बीच सप्तशक्ति के विषय को रखेगी । हम जानते हैं कि हम अपने यहां महाराणा प्रताप शिवाजी जैसे प्रतापी सम्राट की प्रसिद्धि में उनकी माता और अर्धांगिनी का भी सहयोग रहा है ।यदि जीजाबाई नहीं होती तो हम शिवाजी को प्राप्त नहीं कर पाते। प्रारंभ से ही अपनी संस्कृति में मां दुर्गा को हम शक्ति का स्वरूप मानते हैं । कन्या पूजन के माध्यम से हम बालिकाओं का सम्मान करते हैं। आज हम जानते हैं यदि एक कन्या शिक्षित होती है तो दो परिवार शिक्षित होता है । हमें माता को अपनी शक्ति का आभास कराना है ताकि हमारा समाज सुसंस्कृत होकर आगे बढ़े। विद्या भारती की योजना में भी हम सभी बालकों का निर्माण करते हैं जो राष्ट्रभक्ति से ओत – प्रोत होकर समाज को सुसंस्कृत बनाकर समाज को साथ लेकर चलेंगे। चतुर्थ सत्र में मुख्य अतिथि पिंकी मोदक के द्वारा अध्यक्ष उद्बोधन हुआ। विशिष्ट माताओं के सम्मान के लिए मंजू साहू को विद्यालय स्तर से सम्मानित किया गया। अंत में शांति मंत्र के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।
