विशेष लोक अदालत एवं राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाने हेतु सरायकेला न्यायिक पदाधिकारियों की बैठक,
Seraikella
सरायकेला मे आगामी 30 अगस्त 2025 को आयोजित होने जा रही विशेष लोक अदालत तथा 13 सितम्बर 2025 को होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाने हेतु सरायकेला न्यायालय परिसर में न्यायिक पदाधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। यह आयोजन माननीय झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, राँची के निर्देशानुसार तथा श्री रामाशंकर सिंह, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सरायकेला-खरसावाँ की अध्यक्षता में संपन्न हुआ।
इस विशेष बैठक में NI Act (Cheque Bounce Cases), MACT, Land Revenue Matters एवं Family Matters के शीघ्र समाधान के लिए आगामी विशेष लोक अदालत की तैयारियों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। यह विशेष लोक अदालत 4 अगस्त 2025 से 29 अगस्त 2025 तक चलने वाली पूर्व-लोक अदालत बैठकों के माध्यम से पूर्व-सुलह प्रक्रिया के बाद दिनांक 30 अगस्त 2025 को आयोजित की जाएगी।
इसी क्रम में राष्ट्रीय लोक अदालत के आयोजन की भी रूपरेखा तय की गई, जिसकी पूर्व-सुलह बैठकें 14 जुलाई 2025 से प्रारंभ होकर 12 सितम्बर 2025 तक चलेंगी और 13 सितम्बर 2025 को इसे आयोजित किया जाएगा।
इस बैठक में प्रमुख रूप से उपस्थित न्यायिक पदाधिकारी:
श्री बिरेश कुमार, प्रधान न्यायाधीश, Family Court, सरायकेला
श्री सी. ए. मोईज, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश – प्रथम, सरायकेला
श्री ब्रज किशोर पांडेय, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश – द्वितीय, सरायकेला
श्री दीपक मलिक, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश – तृतीय, सरायकेला
श्रीमती अनामिका किस्कु, सिविल न्यायाधीश (Senior Division)-तृतीय-सह-न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी
श्री तौसीफ मेराज, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सरायकेला
श्रीमती धृति धैर्य, अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश (Junior Division)-सह-न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी
विशेष लोक अदालत एवं राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन सिविल कोर्ट, सरायकेला एवं अनुमंडलीय न्यायालय, चांडिल में किया जाएगा।
अध्यक्षता कर रहे माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, श्री रामाशंकर सिंह ने सभी न्यायिक पदाधिकारियों से आग्रह किया कि वे अधिक से अधिक समझौता योग्य मामलों को Refer करें और इन लोक अदालतों को सफलता की ऊँचाई तक पहुँचाएँ।
जनहित में यह पहल न्याय सुलभता की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिससे सैकड़ों पक्षकारों को शीघ्र एवं सस्ता न्याय प्राप्त होगा।
