खरसावां के आमदा मे 12 वर्षों से अधूरा 500 बेड अस्पताल, अस्पताल निर्माण कार्य पूरा कराने की मांग तेज, पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज बनाने की सरकार की तैयारी,
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खरसावां के आमदा में पिछले 12 वर्षों से निर्माणाधीन 500 बेड अस्पताल का मुद्दा एक बार फिर जोर पकड़ रहा है। खरसावां विधायक दशरथ गागराई द्वारा सदन में गैर-सरकारी संकल्प के माध्यम से इस अस्पताल के निर्माण कार्य को शीघ्र पूरा कराने की मांग उठाई गई है।
2011 में मिली थी स्वीकृति, काम रहा अधूरा,
स्वास्थ्य विभाग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार खरसावां के आमदा मे वर्ष 2011 में 153.96 करोड़ रुपये की लागत से 500 शय्या वाले अस्पताल भवन के निर्माण को प्रशासनिक स्वीकृति दी गई थी। लेकिन कार्य की धीमी प्रगति के कारण निर्माण एजेंसी एनबीसीसी लिमिटेड के साथ किया गया अनुबंध समाप्त कर दिया गया।
लागत में भारी वृद्धि बनी बाधा,
बाद में झारखण्ड राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड द्वारा पुनः तैयार प्राक्कलन में परियोजना की लागत बढ़कर 353.04 करोड़ रुपये हो गई, जो पहले की स्वीकृत राशि से काफी अधिक है। इसी कारण योजना पर पुनर्विचार की आवश्यकता पड़ी।
पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज बनाने का निर्णय,
झारखंड सरकार ने अब इस अधूरे अस्पताल को ‘’जैसा है जहां है’ आधार पर वीजीएफ (व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण) स्कीम के तहत पीपीपी मॉडल में मेडिकल कॉलेज के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है।
पहले चरण में गिरिडीह, जामताड़ा, खूँटी और धनबाद के सदर अस्पतालों को इस योजना में शामिल किया गया है।
दूसरे चरण में सरायकेला-खरसावां की बारी
झारखंड सरकार ने दूसरे चरण में सरायकेला-खरसावां के इस अस्पताल को भी मेडिकल कॉलेज में अपग्रेड करने के लिए सैद्धांतिक सहमति दे दी है। इसके लिए भारत सरकार को प्रस्ताव भेजने की प्रक्रिया जारी है।
स्थानीय लोगों की उम्मीदें बढ़ीं
लंबे समय से अधूरे पड़े इस अस्पताल को लेकर क्षेत्र के लोगों में निराशा थी, लेकिन अब इसे मेडिकल कॉलेज में बदलने की योजना से नई उम्मीद जगी है। यदि योजना धरातल पर उतरती है, तो सरायकेला खरसावां जिले सहित कोल्हान में स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
आमदा का 500 बेड अस्पताल अब केवल एक अधूरी परियोजना नहीं, बल्कि भविष्य के मेडिकल कॉलेज के रूप में विकसित होने की दिशा में बढ़ रहा है। हालांकि, स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रक्रिया में तेजी लाकर जल्द से जल्द इसका लाभ जनता को मिले।
