स्वावलंबी जीवन शैली के प्रतीक क्षेत्र के प्रसिद्ध श्री श्री राम बाबा आश्रम में तीन दिवसीय वार्षिक गीता जयंती 29 से।
Seraikela
सरायकेला। भक्तों की आस्था का केंद्र और स्वावलंबी जीवन शैली का प्रतीक माने जाने वाले क्षेत्र के प्रसिद्ध श्री श्री राम बाबा आश्रम में प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी तीन दिवसीय वार्षिक गीता जयंती का आयोजन किया जा रहा है। जिसका शुभारंभ शुक्रवार को गंधाधिवास के साथ किया जाएगा। और शनिवार से तीन दिवसीय वार्षिक गीता जयंती का आयोजन किया जाएगा। जिसमें उत्तर प्रदेश के अयोध्या सहित बिहार, बंगाल एवं उड़ीसा के संत वृद्ध शामिल होंगे। विजय तरण गांव स्थित उक्त श्री श्री राम बाबा आश्रम के व्यवस्थापक प्रमुख श्री मृत्युंजय चैतन्य ब्रह्मचारी एवं भक्त राजू शर्मा द्वारा उक्त जानकारी देते हुए बताया गया कि 29 नवंबर को प्रातः 6:00 बजे से श्री विष्णु सहस्त्रनाम पाठ के बाद सुबह 8:00 बजे से भव्य कलश यात्रा विजय नदी से आश्रम तक की जाएगी। इसके बाद विश्व शांति एवं सर्व कल्याण के लिए यज्ञ का शुभारंभ करते हुए गीता पाठ किया जाएगा। दोपहर 1:00 बजे से सामूहिक प्रसाद सेवन एवं संध्या 6:00 बजे से आरती तथा संध्या 7 से 8 बजे तक गीता प्रवचन और रात्रि 8:00 से 9:00 बजे तक श्री शिव मोहिम्न एवं नामेर महात्म्य का आयोजन किया जाएगा। 1 दिसंबर को यज्ञ पूर्णाहुति के साथ वार्षिक गीता जयंती का समापन किया जाएगा।
आश्रम का सफरनामा:-
विश्व कल्याण के उद्देश्य से स्वावलंबी जीवन शैली के प्रणेता रहे श्री श्री 108 श्री परमहंस परिव्राजकाचार्य स्वामी रामानंद सरस्वती के द्वारा वर्ष 1980 में विजयतरण गांव के समीप विधिवत रूप से राम बाबा आश्रम की स्थापना की गई थी। बताया जाता है कि वर्ष 1951 में राम बाबा उड़ीसा के श्रीमंथपुर से राजनगर प्रखंड अंतर्गत बाना टांगरानी आए थे। आध्यात्म की तलाश में विभिन्न स्थलों का भ्रमण करते हुए वर्ष 1973 में विजय गांव पहुंचे। वहां कुछ दिनों के प्रवास के बाद वापस उड़ीसा लौट गए थे। पुनः वापस लौट कर समीप की विजय नदी में स्नान करने के क्रम में उन्हें एक शैलखंड में हरिहर और माता लक्ष्मी के दर्शन हुए। तब से राम बाबा वही नदी के तट पर कुटिया बनाकर रहने लगे। स्वावलंबी जीवन शैली की प्रेरणा देते हुए अपने संपूर्ण आध्यात्मिक काल में राम बाबा नारियल की खोपड़ी से बने पत्र में लाल चाय सहित अन्य सात्विक तरल पदार्थ का ही सेवन किया। सर्व धर्म समभाव की विचारधारा को मानने वाले राम बाबा ने 117 वर्ष की आयु में 20 जनवरी 2002 को निर्वाण प्राप्त की।
आश्रम देता है स्वावलंबी जीवन शैली का संदेश:-
झोपड़ी से शुरू हुआ राम बाबा आश्रम का सफर आज तकरीबन 22 एकड़ भूभाग पर विस्तृत है। राम बाबा के निर्वाण के पश्चात उनके परम शिष्य रहे श्री मृत्युंजय चैतन्य ब्रह्मचारी के नेतृत्व में तकरीबन 25 अनुयाई आश्रम में रहते हुए स्वावलंबी जीवन जी रहे हैं। जहां नियमित पूजा पाठ के साथ गोपालन एवं कृषि कार्य कर जीवन की आवश्यकता सामग्रियों की प्राप्ति की जाती है। इसके साथ ही आश्रम में रुद्राक्ष सहित अन्य आम, जामुन एवं चंदन जैसे वृक्ष आश्रम की शोभा बढ़ाते हैं।
