खरसावां में राज्य स्तरीय ओडिया नाटक प्रतियोगिता शुरू,
”किनिनेला मना कलानगरे” सामाजिक ओडिया नाटक का हुआ मंचन
ओडिया कला संस्कृति की रक्षा हम सभी की जिम्मेदारी-गागराई
kharsawan
खरसावां के राजमहल चैक (गोपबंधु चैक) में झारखंड सरकार का कला एवं संस्कृति विभाग रांची तथा ओडिशा सरकार का भाषा, साहित्य एवं संस्कृति विभाग (भुवनेश्वर) का सहयोग से भाषा उत्थान एसोसिएशन खरसावां के द्वारा चार दिवसीय राज्य स्तरीय ओडिया नाटक प्रतियोगिता-2026 का शुभआरंभ हो गया। चार दिनो तक चलने वाली राज्य स्तरीय ओडिया नाटक प्रतियोगिता के पहले दिन सबुज संघ कला निकेतन (केरा) के कलाकारों ने ”किनिनेला मना कलानगरे” सामाजिक ओडिया नाटक का भव्य मंचन किया। इसके अलावे श्री श्री मां मनसा ओपेरा (दलकी) द्वारा राखी देइगला अखिरे लुहा, मां शीतला गीतिनाट्य समाज (जामबनी) द्वारा शीतला मंगल नाम जगति पाला तथा गोपाबंधु नाटक विभाग (खांडामौदा) द्वारा ए जुगरा बिशाल्य करणी का मंचन किया जाएगा। राज्य स्तरीय ओडिया नाटक प्रतियोगिता का विधिवत उदघाटन खरसावां विधायक दशरथ गागराई, समाजसेवी बांसती गागराई, प्रमुख मनेंद्र जामुदा, सरायकेला राजा आदित्य प्रताप सिंहदेव, खरसावां राजा गोपाल नारायण सिंहदेव, महारानी अपराजिता सिंहदेव आदि ने दीप प्रज्वलित कर किया। मौके पर श्री गागराई ने कहा कि ओडिया भाषा और संस्कृति का संरक्षण केवल सरकारी दायित्व नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण सामाजिक जिम्मेदारी है। हमें गर्व है कि हम ओडिया भाषी हैं। जिस पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य ओडिया अस्मिता को मजबूत करना है। समृद्ध विरासत को संरक्षित करना और नई पीढी को अपनी भाषा से जोडना है। उन्होने कहा कि इसकी समृद्धि और सुंदरता हमें विशिष्ट बनाती है। हमारी परंपराओं, संस्कृति और विरासत की रक्षा के लिए भाषा का संरक्षण और संवर्धन अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके पहले सभी अतिथियों ने पूर्व सांसद स्वंगीय रूद्र प्रताप सांडगी, झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष स्वंगीय के सी दास एवं खरसावां के उत्कल संतान स्वंगीय डाॅ बी एन कर के चित्र और पंडित उत्कल मणी गोपबंधु दास के प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्वाजंलि दी।

ओडिया अकादमी का गठन करने की मांग
सरायकेला राजा आदित्य प्रताप सिंहदेव ने सरायकेला खरसावां जिले के ओडिया स्कूलों में उडिया शिक्षक की नियुक्ति हो और उडिया पुस्तक वितरण किया जाए। साथ ही ओडिया अकादमी का गठन करने की मांग करते हुए कहा कि ओडिया भाषा संस्कृति को संरक्षित कर रखना हमारे लिए गर्व की बात है। सरायकेला खरसावां जिले में पूजा परंपरा और भाषा संस्कृति, कला संस्कृति जीवित है और आगे भी जीवित रहेगा। उन्होंने कहा कि तत्कालीन बिहार सरकार सरायकेला की कला संस्कृति को दमन करने का प्रयास किया था। लेकिन सफल नही हुआ। बिहार से अलग होकर अलग झारखंड राज्य बनने के बाद झारखंड के तत्कालीन पूर्व मुख्यमंत्री सह तत्कालीन विधायक अर्जुन मुंडा ने ओडिया भाषा को द्वितीय राजभाषा का दर्जा दिया। लेकिन उसे पर अमल नहीं किया गया। श्री सिंहदेव ने कहा किखरसावां के विधायक दशरथ गागराई से अनुरोध करता हूं कि स्कूलों में ओडिया शिक्षक की नियुक्ति हो और ओडिया पुस्तक वितरण किया जाए। साथ ही ओडिया अकादमी का गठन कराने में सहयोग करे।
हमारी संस्कृति सबसे जीेंवत और अनूठी है-गोपाल
खरसावां राजा गोपाल नारायण सिंहदेव ने कहा कि मातुभाषा अपनी सभ्यता और कला संस्कृति के प्रति हमेशा मनोभाव रखना हम सभी का परम कर्तत्व है। समाज के बिकास में तत्पर रहनेवाले महापुरूष गोपबंधु दास ने अपना पूरा जीवन जनता को समर्पित कर दिया था। उन्होने कहा कि अपने भाषा और कला संस्कुति एवं इतिहास कोे संजोने का प्रयास करना है। ताकि दुनिया को बता सके कि हमारी संस्कृति सबसे जीेंवत और अनूठी है।
ये थै मौजूद
खरसावां विधायक दशरथ गागराई, समाजसेवी बांसती गागराई, प्रमुख मनेंद्र जमुदा, राजा आदित्य प्रताप सिंहदेव, खरसावां गोपाल नारायण सिंहदेव, महारानी अपराजिता सिंहदेव, मुखिया सुनीता तापे, मुखिया मंगल सिंह जामुदा, उप मुखिया सुशीला नायक, भाषा उत्थान एसोसिएशन खरसावां के सचिव नंदू पांडे, नरसिंह चरण पत्ती, शाम्बो राउत, जीतवाहन मंडल, सरोज मिश्रा, सरोज मिश्रा, तनु पाणी, केदार दास आदि मौजूद थे।
