गोरखपुर में सरायकेला छऊ की गूंज, पुरवाई लोक कला उत्सव के पहले दिन झारखंड के कलाकारों ने बांधा समां,
Seraikella
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित योगीराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में 21 व 22 फरवरी को आयोजित ‘पुरवाई लोक कला उत्सव’ के प्रथम दिन सरायकेला छऊ नृत्य की भव्य प्रस्तुति ने दर्शकों का मन मोह लिया। यह आयोजन पुरवाई कला, राजकीय बौद्ध संग्रहालय एवं संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

कार्यक्रम में गुरु तपन कुमार पटनायक के नेतृत्व में सरायकेला छऊ दल ने करीब एक घंटे तक मंच पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई। कलाकारों ने ‘हर-पार्वती’, ‘रात्रि’, ‘राधा-कृष्ण’, ‘आरती’, ‘नाविक’, ‘उरुभंग’ और ‘दुर्गा’ सहित कई आकर्षक प्रस्तुतियां दीं। पारंपरिक वेशभूषा, मुखौटों और दमदार नृत्य-भंगिमाओं ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

उद्घाटन सत्र का शुभारंभ पद्मश्री कालूराम बामनिया, पद्मश्री विश्वनाथ प्रसाद तिवारी एवं गुरु तपन कुमार पटनायक ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। अपने संबोधन में गुरु पटनायक ने कहा कि एक छोटे से कस्बे सरायकेला से सात पद्मश्री सम्मान प्राप्त होना इस बात का प्रमाण है कि सरायकेला छऊ भारत के 9वें शास्त्रीय नृत्य का दर्जा पाने की दहलीज पर खड़ा है।

इस राष्ट्रीय स्तर के आयोजन में प्रथम दिवस जहां सरायकेला छऊ ने अपनी कला की सुगंध बिखेरी, वहीं द्वितीय दिवस पर प्रसिद्ध लोक गायिका शारदा सिन्हा की सुपुत्री वंदना सिंह की विशेष प्रस्तुति प्रस्तावित है, जिसे लेकर दर्शकों में खासा उत्साह है।

कार्यक्रम के दौरान गुरु तपन कुमार पटनायक को ‘पुरवाई लोक कला सम्मान’ से सम्मानित किया गया। सरायकेला छऊ दल में संजय कुमार कर्मकार, गोपाल पटनायक, गणेश परिछा, मो. दिलदार, निवारण महतो, रजतेंदु रथ, सनत कुमार साहू, कुसमी पटनायक, परी, विजय सरदार, बैसाखू सरदार, बाबूराम सरदार, तरुण कुमार भोल, पूर्ण चंद्र सरदार, गोपबंधु तांती, सुदीप कुमार घोड़ेई, दशरथ महतो सहित कुल 18 कलाकार शामिल रहे।
आयोजन की सफलता में डॉ. हर्षवर्धन एवं प्रेम जी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सरायकेला के कलाकारों की इस प्रस्तुति ने न केवल झारखंड का मान बढ़ाया, बल्कि राष्ट्रीय मंच पर छऊ नृत्य की समृद्ध परंपरा को भी नई पहचान दिलाई।
