कूचाई के बाडाबांड्री में मना शीला स्थापना दिवस,
जंगल किसी की सम्पत्ति नहीं हमारी संस्कृति है का दिया नारा…,
हमारा जंगल पर पूर्ण अधिकार चाहिए-सोहन लाल कुम्हार
kuchai
कुचाई प्रखंड के अंतर्गत बाडाबांड्री में द्वितीय वनाधिकार पत्थरगाड़ी स्थापना दिवस हर्षाेल्लास के साथ मनाया गया। साथ ही बाडाबांड्री को 2024 में 306. 04 एकड़ वन भूमियों पर सामुदायिक वनाधिकार प्रमाण-पत्र प्रदान की गई है। यह कार्यक्रम आशोक मानकी के आगुवाई में सम्पन्न हुई।

पाहान बुनेड़ीराम मूंडा ने वनदेवता तथा नागे-चंडीएराओं को लाल मुर्गा से पूजा किया। वनाश्रितों महिला-पुरुषों ने नाच-गान करते हुए जुलुस के सक्ल में गांव बड़ाबाण्डीह से बाण्डीह बुरु दिरीबिड तक नारा लगाते हुए गये। वाल अखड़ा के बच्चे-बच्चियों, ग्राम के अन्यन्य छोटे-बड़े महिला-पुरुषों ने नाचते-गाते तथा नारा लगाते हुए गांधी चबुतरा से बांडीहबुरु तक गये। जल-जंगल जमीन हमारा है, जंगल किसी की सम्पत्ति नहीं हमारी संस्कृति है, बिर-बुरु ओकोया-आबुवा-आबुवा, दिरी-दारू ओकोया, वनाधिकार कानून 2006 जिनदाबाद, जंगल क्या देता है हवा-पानी और भोजन देता है, जंगल का संरक्षण कौन करेगा, वाल अखड़ा करेगा, वन्यजीव को क्या करना होगा, संरक्षण करना होगा, न लोक न विधानसभा-सबसे ऊँचा ग्राम सभा आदि नारा लगाते हुए रैली निकाली। पाहन वन देवता को स्थापित शीला को पवित्र हृदय से पूजा अर्चना किया गया।

इस दौरान सभा को संबोधित करते हुए आइसीएफजी के केन्द्रीय सदस्य सोहन लाल कुम्हार ने कहा कि आज द्वितीय वनाधिकार पत्थरगाड़ी स्थापना दिवस मनाया जा रहा है। लेकिन दिल से खुशी नही मना रहे है। जो अधिकार हमको मिलना चाहिए वह अधिकार अभी तक नही मिला है। जंगल का संरक्षण, प्रबंधन करने एवं पुनजीवित करने का अधिकार अभी तक नही मिला है। अभी सिर्फ उपयोग करने का अधिकार मिला है।

यह सदियों से मिला है। उन्होने कहा कि हमारा जंगल पर पूर्ण अधिकार चाहिए। सरकार को इस पर संज्ञान लेना चाहिए। अन्यथा जोरदार आन्दोलन चलेगा। जबकि जंगल आन्दोलनकारी अलेस्टेयर बोदरा ने कहा कि जंगल हमारा जीविकास्त्रोतें है। जंगल ही जीवन है। काफी संघर्ष के बाद वनाधिकार कानून 2006 बना है। लेकिन दुख हो रहा है राज्य में मुख्यमंत्री स्वंय वन मंत्री है। इसके बावजूद भी सामुदायिक वन संसाधनों पर वनाधिकार प्रमाण पत्र निर्गत नहीं किया जा रहा है। सामाजिक कार्यकर्त्ता गलैक्शन डुंगडुंग ने कहा कि सरकार कई प्रकार के कानून तो बनाती है। लेकिन धरातल पर संतोषजनक लागू हो नहीं पा रही है। उन्होने कहा कि केन्द्र सरकार ने 1996 को ही अनुसूचित जनजातियों और आनुसुचित क्षेत्रों के लिये बनाया है। सांसद प्रतिनिधि मान सिंह मुंडा ने कहा कि जंगल का संरक्षण, संबर्धन, पुनरुज्जीवित और प्रबंधन करने का संक्लप लिया गया। कानून बनने के पहले किये गए आन्दोलन के परिणाम स्वरूप हम्मे सामुदायिक एवं व्यक्तिगत पटटा मिला है। आने वाले समय इस जंगल से उपज का उपयोग करना है। इस दौरान मुख्य रूप से भरत सिंह मुुंडातुलसी मुंडा, दामु मुंडा, राधाकृष्ण सिंह मुंडा, सुखराम मुंडा, कारु मुण्डा, सुश्री पार्वती गागराई, बाबलु मुर्मु, वृहस्पति सिंह सरदार, ग्लेकशन डुंगडुंग, आखौरी प्रवास, जेम्स हेरेन्ज, सुरज मनी भगत, एलेक्स टोप्पो, सोहन लाल कुम्हार, सुरजमनी भगत, गौतम सिंह मुण्डा, अलेस्टेयर बोदरा, धर्मेन्दर सिंह मुण्डा, मुन्ना सोय, मानसिंह मुण्डा, मंगल सिंह मुण्डा, सुखराम मुण्डा, टेने मुण्डारी, स्नातन कुन्टिया, मानकी मुण्डा, गोपाल सिंह मुण्डा, रामककृष्ण मुण्डा, आशोक मानकी, भरत सिंह मुण्डा, वनवारीलाल मुण्डा, कारु मुण्डा, पार्वती गागराई, राधाकृष्ण सिंह मुण्डा, मंगल सिंह मानकी, करम सिंह मुण्डा, राजेश मुडरी, दोलु सिंह सरदार, मंगल सिंह मुंडा, लुबूराम सोय आदि उपस्थित थे।
