कुचाई के सेवानिवृत्त शिक्षकों, बीपीओ एवं सीआरपी को दी गई भावभीनी विदाई, नवनियुक्त सहायक आचार्यों का हुआ स्वागत, शिक्षक कभी रिटायर्ड नहीं होता, जीवनभर देता है शिक्षा, इसलिए शिक्षक को ‘समाज का शिल्पकार’ कहा जाता है-कैलाश मिश्रा
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कुचाई के प्रखंड संसाधन केंद्र में शनिवार को शिक्षा विभाग के द्वारा एक सम्मान समारोह आयोजित कर सेवानिवृत्त एवं स्थानांतरित शिक्षकों को भावभीनी विदाई दी गई। वहीं नवनियुक्त सहायक आचार्यों का स्वागत कर उन्हें नई जिम्मेदारियों के लिए शुभकामनाएं दी गईं।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सरायकेला खरसावां जिला शिक्षा अधीक्षक कैलाश मिश्रा, विशिष्ट अतिथि में प्रखंड विकास पदाधिकारी साधुचरण देवगम, कुचाई अंचल अधिकारी सुषमा सोरेन, कुचाई प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी संजय कुमार जोशी तथा प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी खरसावां पंकज कुमार महतो के उपस्थिति मे मध्य विद्यालय सोनपेट के शिक्षक सत्यनारायण प्रजापति, मध्य विद्यालय तिलोंपदा के शिक्षक दिनेश कुमार दास, मध्य विद्यालय सोसोकेरा के शिक्षक हरीशचन्द्र मुकुईया, उत्क्रमित मध्य विद्यालय अतरा के शिक्षक मिथिलेश ठाकुर, संकुल साधन सेवी राम रतन महतो तथा प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी नाथो महतो को सम्मानित कर विदाई दी गई।

इसके अतिरिक्त सहायक अध्यापक वर्ग से रसाय जेठा (उ०म०वि० रोलागतु), बालजुडी के गोवर्धन नागक, दामादिरी के वीरेंद्र सिंह सोय, डोरो के कामदेव महतो, मुकरू महतो, पोंडाकाटा के राधेश्याम मुर्मू, प्रा०वि० घातकीडीह के गुरुचरण महतो, सुगीडीह के घासिया सोय, एवं लुपुंगडीह के कालीपद ठाकुर को भी भावभीनी विदाई दी गई। अतिथियों ने उनके लंबे शैक्षणिक योगदान की सराहना करते हुए कहा कि इन शिक्षकों ने ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की अलख जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

नवनियुक्त सहायक आचार्यों का स्वागत समारोह में लक्ष्मण कुमार माझी (मवि सोनापोर), सुनीता डुंगडुग (मवि भुरकुण्डा), यामलाल सुर्म (कुदाडीह), एलेन सुकृता तिग्गा, संजीत महतो (मरांगहानु), श्रीमती लीला कुमारी (तरम्बा), श्रीमती सीता सोरेन (मेरोगजंगा), रविराज गोप (मेरोमजंगा), वंदना कुमारी दास, दीपक मंडल (प्रा०वि० गुड़गुदरी), राजाराम सोरेन (मवि पुनीबुड़ी), रवि हांसदा (प्रा०वि० पुतुलचीड़), शिवशंकर सुरेन, उनकेश महतो (प्रा०वि० चुनाडीह) एवं चंदन कुमार ज्योतिषी (मवि कुण्डियामाचा) समेत अन्य नवनियुक्त शिक्षकों का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया गया।
कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गईं। मौके पर श्री मिश्रा ने कहा कि शिक्षक कभी रिटायर्ड नहीं होता, जीवनभर शिक्षा देता है। इसलिए शिक्षक को ‘समाज का शिल्पकार’ कहा जाता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के प्रति समर्पण के साथ-साथ इसे जीवन मंत्र बनाने के लिए शिक्षकों की सराहना की जानी चाहिए। एक शिक्षक आजीवन ज्ञान की धारा से जुड़े रहते हैं। वह कार्य से निवृत हो सकता है, लेकिन शिक्षाकार्य से कभी निवृति नहीं ले सकता है। शिक्षाविशारदों को गुरु एवं शिष्य की प्राचीन पावन परंपरा को फिर से स्थापित करने की दिशा में काम करना चाहिए, ताकि विद्यार्थीगण आजीवन अपने शिक्षकों को स्मरण करें। जबकि श्री देवगम ने कहा कि माता-पिता बच्चे को जन्म देते हैं। उनका स्थान कोई नहीं ले सकता, लेकिन एक शिक्षक ही है जिसे हमारी भारतीय संस्कृति में माता-पिता के बराबर दर्जा दिया जाता है, क्योंकि शिक्षक ही हमें समाज में रहने योग्य बनाता है। शिक्षक को ‘समाज का शिल्पकार’ कहा जाता है। नए शिक्षक ऊर्जा और नवाचार के साथ शिक्षा की गुणवत्ता को और बेहतर बनाएंगे। समारोह का समापन सभी शिक्षकों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर एवं उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ किया गया।
