कुचाई में ””पोषण भी-पढ़ाई भी”” कार्यक्रम के तहत
आंगनबाड़ी सेविकाओं का तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर संपन्न
आंगनबाड़ी केंद्रों को सशक्त बनाने की प्राथमिकता
kuchai
कुचाई प्रखंड सभागार भवन में बाल बिकास परियोजना कुचाई के द्वारा बच्चों के समग्र विकास सुनिश्चित करने के लिए ””पोषण भी पढ़ाई भी”” के तहत आंगनबाड़ी सेविकाओं के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण शिविर के समापन में मुख्य रूप से उपस्थित कुचाई प्रखंड बिकास पदाधिकारी सह बाल बिकास परियोजना पदाधिकारी साधु चरण देवगम ने कहा कि कुचाई प्रखंड क्षेत्र के 129 आंगनबाड़ी सेविकाओं में से 47 सेविकाओं का तीन दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न हो गया। प्रशिक्षण के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बच्चों के विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षण दिया गया। श्री देवगम ने बताया कि इस प्रशिक्षण में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को नवीन शिक्षा नीति 2020 के तहत अपनाए गए पाठ्यक्रमों की जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि 0 से 3 वर्ष के बच्चों के लिए प्रारंभिक प्रोत्साहन (अर्ली स्टीमुलेशन) नवचेतना पाठ्यक्रम के तहत लागू किया गया है, वहीं 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए अर्ली चाइल्डहुड केयर एंड एजुकेशन के तहत आधारशिला पाठ्यक्रम लागू किया गया है।

बच्चों के सर्वांगीण विकास पर जोर
नवचेतना और आधारशिला पाठ्यक्रमों के अंतर्गत बच्चों के संज्ञानात्मक, भाषा, संवेगात्मक, रचनात्मक, शारीरिक और सामाजिक विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है। मास्टर ट्रेनरों द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को पोषण और शिक्षा के समन्वय के महत्व के बारे में प्रशिक्षण दिया गया। उन्होंने बताया कि बच्चों के मस्तिष्क का 85 प्रतिशत विकास 6 वर्ष से कम आयु में होता है, और यदि इस दौरान बच्चों को उचित पोषण और शिक्षा मिले तो उनके भावी विकास की संभावनाओं में अपार वृद्धि हो सकती है।
आंगनबाड़ी केंद्रों को सशक्त बनाने की प्राथमिकता
सीडीपीओ साधु चरण देवगम ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों को मानव संसाधनों के विकास की नर्सरी के रूप में और अधिक सक्षम बनाना सरकार की प्राथमिकता है। मास्टर ट्रेनर ने बताया कि हमें अपनी पोषण संबंधी आदतों को सुधारने की आवश्यकता है और हमारी थालियों में मोटे अनाज सहित सभी पोषण समूहों को शामिल करना चाहिए। मास्टर ट्रेनर कैल्शियम और विटामिन डी की कमी से बच्चों के हड्डियों के विकास में रुकावट आने की बात कही। उन्होंने बच्चों को हड्डियों के विकास के लिए दूध और दुग्ध उत्पादों के साथ-साथ नियमित रूप से धूप का सेवन करने की सलाह दी। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल 47 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। इस दौरान प्रशिक्षक की भुमिका महिला प्रवेक्षिका सरस्वती मांझी ने निभाई।
