कोल्हान नितिर तुरतुंग ने कुचाई में जेपीएससी सफल अभ्यर्थियों का भव्य सम्मान समारोह,संकल्प और सफलता की प्रेरणादायक कहानियों को किया साझा,
Kuchai
कुचाई मे कोल्हान नितिर तुरतुंग (KNT), कुचाई केंद्र के लिए ऐतिहासिक बन गया। KNT द्वारा आयोजित भव्य सम्मान समारोह में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की प्रतिष्ठित परीक्षा में सफल हुए कुचाई और आसपास के गांवों के तीन प्रतिभाशाली युवाओं को सम्मानित किया गया। जिसमें कुचाई के मरागंहातु निवासी संदीप बांकिरा, कुचाई के कसराउली निवासी नीरज कांडीर एवं खूंटपानी के बड़ाचिरु निवासी अमंत पाड़ेया को पुष्पगुच्छ और शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया और पूरे कोल्हान क्षेत्र के लिए प्रेरणा का प्रतीक बताया गया। इस समारोह की खास बात यह रही कि यह सिर्फ एक सम्मान कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह मंच बन गया संघर्ष, संकल्प और सफलता की प्रेरणादायक कहानियों को साझा करने का। सफल अभ्यर्थियों के माता-पिता ने बताया कि कैसे उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में अपने बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता दी। दिन-रात मेहनत की और उन्हें अधिकारी बनने के योग्य बनाया। इन भावुक और सच्ची कहानियों ने उपस्थित जनसमूह की आंखें नम कर दीं।
“मेरी सफलता मेरे माता-पिता की देन है”-अभ्यर्थियों का संदेश
सम्मानित अभ्यर्थियों ने मंच से स्पष्ट कहा कि उनकी सफलता माता-पिता के त्याग और प्रोत्साहन की देन है। उन्होंने छात्रों से कहा कि सपनों को पूरा करने के लिए कठिन परिश्रम, समय का सही प्रबंधन और कभी हार न मानने वाला नजरिया जरूरी है। उन्होंने छात्रों के साथ तैयारी से जुड़े अनुभव, स्ट्रेटजी, समय प्रबंधन, और सफलता के रहस्य साझा किए जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी रहे।तीनों अभ्यर्थियों ने छात्रों को बताया कि
रोजाना एक नियत समय पर अध्ययन करना। सही गाइडेंस और सामग्री का चयन मॉक टेस्ट व पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का अभ्यास और सबसे जरूरी – आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच
यही वो चार सूत्र हैं, जिनसे कोई भी छात्र किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में सफलता प्राप्त कर सकता है। इस दौरान मुख्य रूप से KNT के संरक्षक ज्ञान सिंह बोराईबुरु, अध्यक्ष माझी राम जामुदा, उपाध्यक्ष रामचंद्र सोय, प्रखंड विकास पदाधिकारी साधु चरण देवगम, मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, बुंडू अनुमंडल डॉ. अविनाश चंद्र सोय, हरी चरण सोय, मुन्ना सोय, पूर्व सैनिकों लखिन्द्र भूमिज, गोपाल कृष्णा सोय, गुरुचरण चोड़ा आदि उपस्थित थे।
