जिले में प्रखंडों में संचालित है जीआरसी, इस साल पांच ओर संचालित होंगे, महिलाओं के खिलाफ जेंडर आधारित भेदभाव को रोकने के लिए प्रयासरत,
Kharsawan
खरसावां : महिलाओं के खिलाफ जेंडर आधारित भेदभाव को रोकने के लिए प्रखंड स्तर पर जेंडर रिसोर्स सेंटर (जीआरसी) खोला जा रहा है। जिले के सरायकेला, कुचाई व खरसावां में एक-एक जेंडर रिसोर्स सेंटर संचालित है, जबकि इस वर्ष ईचागढ़, नीमडीह, चांडिल, गम्हरिया, राजनगर में में खोला जाएगा. इसके लिये सरकार से स्वीकृति मिल चुकी है। जेंडर रिसोर्स सेंटर जेएसएलपीएस के माध्यम से संचालित है।

जेंडर रिसोर्स सेंटर में घरेलू हिंसा, प्रताड़ना, और सामाजिक कुप्रथाओं के प्रति गांवो में जागरुकता लाया जा रहा है। ये केंद्र महिलाओं को कानूनी और प्रशासनिक सहायता प्रदान करने, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने, और ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए प्रशासनिक और कानूनी सेवाओं से जोड़ते हैं। इस अभियान के जरिए ग्रामीण इलाकों में महिलाओं के खिलाफ हिंसा, उत्पीड़न, बाल विवाह, कन्या भ्रूण हत्या, डायन कुप्रथा पर कार्यक्रम चलाया जा रहा है। ये केंद्र घरेलू हिंसा जैसी समस्याओं को सामाजिक स्तर पर हल करने का प्रयास करते हैं और आवश्यकता पड़ने पर बेघर महिलाओं को आपातकालीन आवास भी प्रदान करते हैं। इसके अलावे भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से जिला स्तर पर ‘सखी – वन स्टॉप सेंटर’ कार्यरत है। यह ‘मिशन शक्ति’ योजना के तहत संचालित है। हिंसा से प्रभावित महिलाओं को एक ही छत के नीचे तत्काल, आपातकालीन और गैर-आपातकालीन सहायता प्रदान की जाती है। इसमें चिकित्सा सहायता, पुलिस डेस्क, कानूनी सहायता, मनोवैज्ञानिक परामर्श और अस्थायी आश्रय शामिल हैं। इस दौरान मुख्य रूप से बीपीएम रमेश प्रसाद द्विवेदी, पार्वती गागराई, शिल्पा लेयांगी, पानो हेम्ब्रम, अनिल महतो, राखी सोय, सरला महतो, रेशमा महतो, कैरी सोय, मनिषा मुण्डा आदि उपस्थित।
