चैत्र पर्व को महोत्सव में न बदलें, परंपरा की मर्यादा बनी रहे : प्रताप आदित्य सिंहदेव
Seraikella
सरायकेला। सरायकेला के राजा सह श्री कलापीठ के संरक्षक प्रताप आदित्य सिंहदेव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि सरायकेला का चैत्र पर्व यहां की प्राचीन पारंपरिक धरोहर है, इसलिए इसे महोत्सव के रूप में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूर्व में भारत सरकार के साथ हुए समझौते के तहत इस पर्व का आयोजन राज्य सरकार द्वारा किया जाता रहा है और यह केवल एक परंपरा के रूप में ही आयोजित होता आया है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस ऐतिहासिक परंपरा को उसी स्वरूप में बनाए रखा जाना चाहिए और इसे धूमिल करने या इसके मूल स्वरूप में बदलाव करने की चेष्टा नहीं की जानी चाहिए।
प्रताप आदित्य सिंहदेव ने कहा कि यदि जिला प्रशासन सांस्कृतिक महोत्सव आयोजित करना चाहता है तो इसके लिए अलग अवसर तय किए जा सकते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि अंतरराष्ट्रीय डांस दिवस (29 अप्रैल) तथा सरायकेला जिला स्थापना दिवस (30 अप्रैल) के अवसर पर जिला प्रशासन महोत्सव का आयोजन कर सकता है। ऐसे कार्यक्रमों में विभिन्न प्रकार की कला एवं कलाकारों को आमंत्रित कर सांस्कृतिक आयोजन किया जा सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में आयोजित होने वाले चैत्र पर्व में केवल स्थानीय कलाकारों की भागीदारी होनी चाहिए और इसमें सरायकेला शैली की सरायकेला शैली की छऊ नृत्य तथा पारंपरिक रीति-रिवाजों का ही निर्वाह किया जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस ऐतिहासिक परंपरा में किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरायकेला की सांस्कृतिक पहचान उसकी परंपराओं से जुड़ी हुई है और इसे संरक्षित रखना सभी की जिम्मेदारी है।
