चांडिल के तुलिन में फैला डायरिया, स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची, ग्रामीणों ने जताई नाराज़गी,
Chandil सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल प्रखंड अंतर्गत चिलगु पंचायत स्थित तुलिन गांव में डायरिया का प्रकोप एक सप्ताह से जारी है। ग्रामीणों के अनुसार गांव के लगभग 10 परिवारों के 18 लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं। वहीं गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग की पांच सदस्यीय टीम गांव पहुंची और मेडिकल जांच व प्राथमिक उपचार की व्यवस्था की गई। टीम के कोऑर्डिनेटर संतोष सिंह ने बताया कि उन्हें बुधवार देर शाम डायरिया की सूचना मिली जिसके बाद गुरुवार को टीम गांव में पहुंची।

उन्होंने बताया कि प्राथमिक जांच में तीन मरीजों की स्थिति चिंताजनक पाई गई जिन्हें ड्रिप दी गई है जबकि अन्य को दवाएं देकर आराम करने की सलाह दी गई है। उन्होंने बताया कि जरूरतमंद लोग स्वास्थ्य सहिया से दवाएं प्राप्त कर सकते हैं। स्थानीय स्वास्थ्य सहिया सोमबारी हांसदा ने कहा कि बीमारी के शुरूआती दिनों में उन्होंने स्वयं लोगों को दवाएं वितरित की थीं लेकिन उसके बाद किसी ने उन्हें ताज़ा हालात की जानकारी नहीं दी। उन्हें बुधवार को ही बीमारी के बढ़ने की जानकारी मिली। चांडिल सीएचसी के डॉक्टर वनबिहारी ने बताया कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और सभी प्रभावितों को दवाएं दी गई हैं। गंभीर मरीजों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। गांव के माझी बाबा सुखदेव मरांडी ने स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही पर नाराज़गी जाहिर करते हुए कहा कि जब गांव में दो स्वास्थ्यकर्मी मौजूद हैं तो एक सप्ताह बाद मेडिकल कैंप क्यों लगाया गया? उन्होंने कहा कि यह गांव एक राजस्व गांव है और यहां लगभग 45 परिवार रहते हैं। बीमारी के लक्षण शुरू होते ही सहीया को तुरंत विभाग को सूचित करना चाहिए था और समय पर कैंप की व्यवस्था करनी चाहिए थी। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ लोग इलाज के लिए पश्चिम बंगाल के बलरामपुर जा चुके हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सहिया को बीमारी की जानकारी थी तो उन्होंने दोबारा घर-घर जाकर लोगों की स्थिति क्यों नहीं जानी? डायरिया एक गंभीर बीमारी है और समय पर इलाज नहीं मिलने से जान भी जा सकती है। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और गांवों में नियमित स्वास्थ्य निगरानी की व्यवस्था की जाए।
