छाता पोखर मेला व मकर संक्रांति पर्व से पूर्व चांडिल डैम का जलस्तर 180 RL से नीचे करने की मांग,
Seraikella
सरायकेला (बिद्युत महतो) विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश रंजन ने कुकडू प्रखंड की ओढ़िया पंचायत स्थित दयापुर–कुमारी गांव का ऐतिहासिक एवं धार्मिक आस्था का केंद्र छाता पोखर मकर संक्रांति पर्व के अवसर पर लगने वाले छाता पोखर मेला के पहले चांडिल डैम का जल भंडारण 180 आर एल से कम करने का मांग पत्र उपायुक्त के अनुपस्थित में प्रधान लिपिक विश्वनाथ मुर्मू को सौंपा। फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश रंजन ने बताया कि मकर संक्रांति के दिन दुलमी, दयापुर, ओढ़िया, हेंसालोंग, पलाशडीह, लेटेमदा, दारुदा सहित अनेक गांवों से हजारों श्रद्धालु यहां पवित्र स्नान एवं पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।
बताया कि वर्तमान में चांडिल डैम का जलस्तर 180 आर एल से अधिक होने के कारण छाता मां का मंदिर, पूजा स्थल एवं मेला क्षेत्र जलमग्न है। जलभराव के चलते भारी कीचड़ की स्थिति बन गई है, जिससे मकर संक्रांति पर्व एवं छाता पोखर मेला के आयोजन में गंभीर बाधा उत्पन्न होने की आशंका है।
उन्होंने कहा कि छाता पोखर का ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व है। लोकमान्यताओं के अनुसार ताल-बेताल सिद्ध महाराज विक्रमादित्य द्वारा मकर संक्रांति के पावन अवसर पर यहां स्नान एवं पूजा की परंपरा प्रारंभ की गई थी। वहीं, लोककथाओं के अनुसार महाराज विक्रमादित्य ने अपनी पत्नी प्रभावती देवी के स्नान हेतु दैविक शक्ति से एक ही रात में विशाल छाता पोखर का निर्माण कराया और उसके मध्य छाता मां के मंदिर की स्थापना कराई। यह परंपरा सदियों से आज तक निरंतर चली आ रही है। उन्होंने प्रशासन से लोगों की आस्था को देखते हुए जल भंडारण कम करने का मांग किया है। उन्होंने सांसद, विधायक एवं वरिय पदाधिकारीयों को भी मांग पत्र सौंपकर डैम का जलस्तर घटाने का मांग किया है।
