खरसावां में सादगी से उत्कल सम्मिलनी ने मनाया 90 वां उत्कल दिवस, भाषा-साहित्य के उत्थान का संक्लप, हमारी संस्कृति सबसे जीेंवत और अनूठी है-कामाख्या
Kharsawan खरसावां में मंगलवार को उत्कल सम्मिलनी उडिया शिक्षक संघ सरायकेला खरसावां के द्वारा सादगी से 90 वां उत्कल दिवस मनाया। उत्कल दिवस कार्यक्रम का शुभआरंभ ने राजमहल चौक स्थित पंडित उत्कल मणी गोपबंधु दास के प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया गया। इस दौरान उडिया समाज के लोगो ओड़िया भाषा संस्कृति के उत्थान का संक्लप लिया। मौके पर सेवानिवृत शिक्षक कामाख्या प्रसाद सारंगी ने कहा कि मातुभाषा अपनी सभ्यता संस्कृति के प्रति हमेशा मनोभाव रखना हम सभी का परम कर्तत्व है। समाज के बिकास में तत्पर रहनेवाले महापुरूष गोपबंधु दास ने अपना पूरा जीवन जनता को समर्पित कर दिया था। उन्होने कहा कि अपने भाषा संस्कुति एवं इतिहास कोे संजोने का प्रयास करना है। ताकि दुनिया को बता सके कि हमारी संस्कृति सबसे जीेंवत और अनूठी है। श्री सारंगी ने कहा कि भाषा-संस्कृति को कैद कर नही रखा जा सकता है। सकारात्मक सोच के साथ भाषा संस्कृति की रक्षा कर बिकास में अपना योगदान दे। उन्होने कहा कि भाषा संस्कृति के लिए अपने जीवन को न्योछावर करने वाले गोपबंधु दास का सम्मान करना हम सभी का परम कर्तव्य है। उन्होने अपनी माटी और अपने लोगों के भविष्य के लिए वे अपना सारा जीवन अर्पित कर दिया। इस दौरान मुख्य रूप से सेवानिवृत शिक्षक कामाख्या प्रसाद सारंगी, सुमंत महांती, बिरोजा पति, सुशील साडगी, अजय प्रधान, जयजीत सांडगी, सुजीत हाजरा, संपन मंडल, रंजीत मंडल, चंद्रभानु प्रधान, सपना टोप्पो, रचिता मोहंती, कुंती मंडल, बबीता मंडल, सविता विषेई, वंदना दास, रश्मि रंजन मिश्रा, कनिता दे, झुमी मिश्रा अर्चना प्रधान, सुष्मिता प्रधान, सपना नायक, शिवचरण महतो, सत्यव्रत चौहान आदि उपस्थित थे।
हमारा आत्मा ओडिया है- सुशील सारंगी
उत्कल सम्मिलनी के जिला प्ररिदर्शक सुशील सारंगी ने कहा कि हमारा भाषा पियोर ओडिया नही है, पर हमारा आत्मा ओडिया है। हमारा रहन-सहन सहित पुरा कल्चर उडिया से जुडा है। उन्होने कहा कि हमारे आने वाले जेनरेशन को ओडिया भाषा-संस्कृति व ओडिया शिक्षा में ज्ञान देने पर विचार करना चाहिए। ताकि ओडिया मातुभाषा और अपनी सभ्यता संस्कृति को जन-जन तक पहुचाया जा सके।