गम्हारिया के विभिन्न गांवो में नुक्कड़ नाटक के माध्यम से
आयुष पद्धति के प्रति ग्रामीणों को किया जागरूक, आयुष केवल रोगों
का इलाज नहीं, बल्कि जीवन जीने की है एक स्वस्थ पद्धति
Gamharia
झारखंड सरकार के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के निर्देशानुसार सरायकेला-खरसावां जिला आयुष समिति के सौजन्य से राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत जिले के विभिन्न प्रखंडों में नुक्कड़ नाटक के माध्यम से जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में गम्हारिया प्रखंड के बडाकाकडा, बाधडीह, झापडागुडा और नारायणपुर गांवों में कलाकारों ने नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर ग्रामीणों को आयुष चिकित्सा पद्धति के प्रति जागरूक किया।

गम्हारिया प्रखंड के बडाकाकडा और बाधडीह गांव में छऊ नृत्य कला केंद्र के कलाकारों ने, जबकि झापडागुडा और नारायणपुर गांव में लोक कला मंच के कलाकारों ने संगीत, नृत्य और नाटक के माध्यम से लोगों को आयुष चिकित्सा पद्धति अपनाने का संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान आयुष चिकित्सा पद्धति (आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी) को जन-जन तक पहुंचाकर स्वस्थ व समृद्ध भारत का निर्माण करना ही मुख्य संदेश है। यह पारंपरिक ज्ञान रोग निवारण, समग्र स्वास्थ्य जीवन शैली और रोग प्रतिरोधी क्षमता को बढ़ाता है। कलाकारों ने अपने नाट्य मंचन के जरिए बताया कि आयुष केवल रोगों का इलाज नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक स्वस्थ पद्धति है। शारीरिक, मानसिक और आत्मिक स्वास्थ्य के लिए योग और आयुष अपनाएं। स्वस्थ नागरिक, समर्थ राष्ट्र – स्वस्थ भारत, समृद्ध भारत का संक्लप है। नुक्कड़ नाटक के माध्यम से आयुष पद्धति के स्वास्थ्य जागरूकता को घर-घर पहुँचाना। योग से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, आयुर्वेद से जीवनशैली को संतुलित करने, होम्योपैथी से सुरक्षित इलाज करने, प्राकृतिक चिकित्सा से शरीर को शुद्ध करने का संदेश दिया। आयुष से जीवन को समृद्ध और स्वास्थ्य को सुरक्षित बनाने का सुलभ तरीका है। इस दौरान जिला आयुष विभाग सरायकेला-खरसावां द्वारा संचालित योजनाओं की भी जानकारी दी गई। बताया गया कि जिले में आयुष्मान आरोग्य मंदिर के नाम से कुल 18 आयुष चिकित्सा केंद्र संचालित हैं, जबकि 9 आयुष केंद्र स्वास्थ्य उपकेंद्रों के साथ संयुक्त रूप से संचालित किए जा रहे हैं। साथ ही वयोमित्र योजना, करुणा योजना, आयुष ग्राम कैंप, औषधीय पौधा वितरण योजना, गैर-संचारी रोग जांच एवं प्रकृति परीक्षण सहित अन्य योजनाओं के बारे में भी ग्रामीणों को जानकारी दी गई। कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों की अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिली। लोगों ने आयुष चिकित्सा पद्धति और विभाग की योजनाओं के प्रति गहरी रुचि दिखाई और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संकल्प लिया।
