गम्हारिया के 50 सेविकाओं में स्मार्टफोन का वितरण,
गर्भवती महिला का गोद भराई और बच्चो का कराया अन्नाप्राशन रस्म,
आंगनबाड़ी केन्द्रों को डिजिटल बनाना अनिवार्य है-गागराई,
Gamharia झारखंड सरकार द्वारा राज्य भर की आंगनबाड़ी सेविकाओं को स्मार्टफोन दिए जा रहे हैं ताकि उनकी कार्यप्रणाली को और अधिक तकनीकी और प्रभावी बनाया जा सके। इसी क्रम में गुरूवार को खरसावां विधानसभा क्षेत्र के अंगतर्गत गम्हारिया आकांक्षी प्रखंड मुख्यालय में प्रखंड के बांधडीह, चमारू, नारायणपुर, बिरबांस, दुगनी, मुडिया व टंेटोपोसी पंचायत के 50 आंगनबाड़ी सेविकाओं के बीच स्मार्ट फोन का वितरण किया।

वही पोषण पकवाड़ा कार्यक्रम के तहत गर्भवती महिलाओ का गोद भराई और बच्चो का अन्नाप्राशन कराया गया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपस्थित खरसावां विधायक दशरथ गागराई ने सेविकाओं में स्मार्टफोन का वितरण करते हुए कहा कि डिजिटल डिवाइड को पाटने और गुणवŸाापूर्ण शिक्षा तक समान पहुच सुनिश्चित करने के लिए आंगनबाड़ी केन्द्रों को डिजिटल बनाना अनिवार्य है। यह परिवर्तन आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सशक्त बनाएगा, छात्रो की सहभागिता बढाएगा और बच्चों को प्रौद्यागिकी संचालित दुनिया के लिए तैयार करेगा। उन्होने ने कहा कि स्मार्ट फोन सरकार की तरफ से कोई तोहफा नहीं, बल्कि आंगनबाड़ी सेविकाओं की जरूरत है। इस स्मार्ट फोन के माध्यम से वह महिला, बाल विकास एवं समाज कल्याण विभाग से जुड़ी योजनाओं को समय रहते धरातल पर उतार पाएंगी। उन्होने कहा कि हेमंत सोरेन की अगुवाई वाली गठबंधन सरकार आंगनबाड़ी सेविकाओं की बेहतरी के लिए हमेशा से प्रयासरत रही है और आगे भी उनके लिए काम करती रहेगी। इस दौरान मुख्य रूप से खरसावां विधायक दशरथ गागराई, सीडीपीओ दुर्ग्रेश नंदनी, मुखिया, वार्ड सदस्य, सेविका, सुपरवाइजर आदि उपस्थित थे।

कुपोषण को मिटाने हेतु जागरूक जरूरी-दशरथ
गर्भवती महिलाओ का गोद भराई और बच्चो का अन्नाप्राशन कराते हुए खरसावां विधायक दशरथ गागराई ने कहा कि कुपोषण को मिटाने के लिए लोगों को जागरूक होना जरूरी है। उनके खान-पान की आदतों में सुधार लाने का भी प्रयास किया जा रहा है। उन्होने कहा कि कुपोषण की वजह से किसी भी पुरूष, महिला व बच्चे का सर्वांगीण विकास नहीं हो पाता है, जिससे उनके कार्य करने की क्षमता घट जाती है। इससे उस व्यक्ति के साथ उसके परिवार, समाज को प्रभावित करता है।
कुपोषण माता और बच्चे के विकास में बाधक है-सीडीपीओ
गम्हारिया बाल बिकास पदाधिकारी दुर्ग्रेश नंदनी ने कहा कि कुपोषण, खासकर गर्भावस्था और शुरुआती बाल विकास के दौरान, माता और बच्चे के विकास में एक महत्वपूर्ण बाधक है। यह बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित करता है और माता के स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है। उन्होंने कहा कि एक से छह वर्ष के बीच के बच्चों तथा गर्भवती महिलाओं को कुपोषण से मुक्त बनाना ही इस पकवाड़ा कार्यक्रम का उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि पोषण अभियान को एक जन आंदोलन की तरह चलाने की जरुरत है। इसके लिए लोगों के सहयोग बेहद जरूरी है।
