कुचाई के रायसिंहदिरी में मना 12वाँ वनाधिकार स्थापना
दिवस, 641 एकड़ 33 डी0 वन भूमि पर वनाश्रितो का दखल, पारंपरिक
तरीके से पुनः नये पत्थर की स्थापना कर की पूजा-अर्चना
kuchai कुचाई प्रखंड के सुदूरवर्ती और जंगलों से घिरे मौजा रायसिंहदिरी में आज 12वाँ वनाधिकार स्थापना दिवस बड़े ही उत्साह, गरिमा और जनसंघर्ष की स्मृतियों के साथ मनाया गया। यह बस्ती समुद्र तल से लगभग 2000 फीट की ऊँचाई पर स्थित है, जिसमें 13 टोले, 225 परिवार और 760 से अधिक जनसंख्या निवास करती है। कुल 4139.62 एकड़ क्षेत्रफल वाले इस गाँव में लगभग 641.33 एकड़ वन भूमि पर स्थानीय वनाश्रितों का परंपरागत और वैधानिक दावा है। कार्यक्रम की शुरुआत में ग्रामवासियों ने एक 10 फीट ऊँचे प्रतीक पत्थर को स्थापित किया। पहले 2013 में यह पत्थर गाड़ा गया था, लेकिन उसके टूटने को अशुभ मानते हुए नये पत्थर की पुनः स्थापना की गई। पहान सागर मुंडा और पाण्डु मुंडा ने परंपरागत वन देवता, नागे-चांडी और एराओं को साक्षी मानते हुए पूजा अर्चना की। यह पत्थर ग्राम की सामूहिक स्मृति, संघर्ष और प्रकृति से रिश्ते का प्रतीक माना गया। रायसिंहदिरी में आज का आयोजन केवल एक वार्षिक समारोह नहीं, बल्कि झारखंड जंगल बचाओ आंदोलन (जेजेबीए) और आईसीएफजी जैसे संगठनों के दो दशकों से अधिक समय के संघर्ष और समुदाय के नेतृत्व में विकास का साक्ष्य रहा। यह कार्यक्रम एक्सपोजर विजिट का हिस्सा था, जिसमें खरसावां विधायक दशरथ गागराई, कोलाबिरा विधायक विक्शल कोंगाड़ी सहित झारखंड भर के जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, पर्यावरण प्रेमी और शोधार्थी शामिल हुए।

सदन में वन प्रबंधन अधिकार दिलाने की मांग उठाएंगे-गागराई
खरसावां विधायक दशरथ गागराई ने कहा कि झारखंड जंगल बचाओ आंदोलन ने इस गांव को बदलने में मुख्य भूमिका निभाई है। उन्होंने आश्वस्त किया कि वे आगामी झारखंड विधानसभा सत्र में ग्राम सभा को वन प्रबंधन अधिकार प्रमाण-पत्र दिलाने की मांग को उठाएंगे।
वनाधिकार के मुद्दे को टीएसी में रखने का वचन
कोलेबिरा विधानसभा क्षेत्र के विधायक नमन बिक्सल कोंगाड़ी ने कुचाई के रायसिंहदिरी की तुलना सेकेंड कश्मीर से करते हुए कहा कि यह गाँव जंगल संरक्षण और अधिकारों की दृष्टि से पूरे राज्य के लिए प्रेरणा है। उन्होंने वनाधिकार के मुद्दे को टीएसी में रखने का वचन दिया।
रायसिंहदिरीः जंगल और अधिकार के समन्वय की अनूठी मिसाल
आईसीएफजी के केन्द्रीय सदस्य सोहनलाल कुम्हार ने स्पष्ट रूप से कहा कि अब तक राज्य में जितने सामुदायिक वनाधिकार पत्र दिए गए हैं वे अधूरे और गैर-कानूनी तरीके से जारी हुए हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक ग्राम सभा को दो प्रमाण-पत्र (उपयोग और प्रबंधन) मिलना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। अतः ईस मुद्दा को जनजातीय सलाहकार परिषद तथा विधानसभा में मजबूती के साथ राखा जाना चाहिए। तभी धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष आभियान सफल कहलाएगा।
विकास की नई पहचानः रायसिंहदिरी के उपलब्धियाँ
ग्राम सभा के सचिव सागर गागराई और पाण्डु मुण्डा ने बताया कि कुचाई के के उपलब्धियाँ विकास की नई पहचान है। कैसे यह गांव बेचिरागी (गैर-मान्यता प्राप्त) से राजस्व ग्राम बना। आज यहां 145 वनाश्रितों को व्यक्तिगत वनाधिकार प्रमाण-पत्र, सामुदायिक वनाधिकार प्रमाण-पत्र, पक्की सड़क, बिजली, विद्यालय, आंगनबाड़ी, पीडीएस, 100 आबुआ आवास, 14 चुआं निर्माण, हल्दी की प्रोसेसिंग यूनिट, बैंक लोन की सुविधा,जीटीडीएस से भूमि समतलीकरण योजना, मतदाता सूची में नाम, वृद्धा पेंशन, बाढ़ से सुरक्षा हेतु तालाब निर्माण, जैसी बुनियादी सुविधाएं आज उपलब्ध हैं।
किसने क्या कहा जानेः-
Û अखौरी प्रवास ने कहा कि रायसिंहदिरी के वनाश्रितों ने न केवल जंगल को बचाया बल्कि उसका सदुपयोग और पुनरुत्थान भी किया।
Û सूरजमनी भगत ने रायसिंहदिरी की महिलाओं की हल्दी खेती और जीविकोपार्जन की सराहना की।
Û राजेश कुमार महतो ने कहा कि इस गाँव से पूरे झारखंड को सीख लेनी चाहिए और वनाधिकार कानून के तहत सभी प्रमाण-पत्र विधिसम्मत ढंग से जारी किए जाने चाहिए।
Û सासंद प्रतिनिधि मानसिंह मुंडा ने कहा कि कई ग्राम सभाओ को सामुदायिक वनाधिकार प्रमाण पत्र निर्गत किया जा रहा है लेकिन विधिसम्मत नहीं मिल रहा है जिसे झारखण्ड सरकार ध्यान दे।
Û विधायक प्रतिनिधि भरत सिंह मुण्डा ने कहा कि आज 15 साल पूर्व रायसिंहदिरी पहाड़ में जंगल नहीं के बराबर थे लेकिन आज बहुत घना हो गया है, ईसे स्पष्ट होता है कि रायसिंहदिरी के वनाश्रित जंगल के प्रति कितना जबाब देही हैं।
ये थै मौजूद
खरसावां विधायक दशरथ गागराई, कोलेबिरा विधानसभा क्षेत्र के विधायक नमन बिक्सल कोंगाड़ी, अखौरी प्रवास, सोहनलाल कुम्हार, राजेश कुमार महतो, सूरजमनी भगत, एलेक्स टोप्पो, मोतिलाल बेसरा, मानसिंह मुंडा, प्रकाश भारती, हीरालाल मुर्मू, बाबलू मुर्मू, कुन्दन गुप्ता कारु मुण्डा, भरत सिंह मुण्डा, प्रेम कुमार महतो, सुखराम मुंडा, दामु मुंडा, देवेन्द्र मंुडा, मंगल सिंह मुंडा, मुन्नासोय, राहुल सोय, कुण्डिया सोय, आदि मौजूद थे।
