खरसावां के जोजो कुड़मा में प्राकृति, पंरपरा और पशु
सम्मान के प्रतीक सोहराय पर्व हषोल्लास के साथ सम्पन्न, सोहराय
पर अंतिम दिन परंपराओं के अनुसार हुई बरदखूंटा कार्यक्रम,
kharsawan
खरसावां प्रखंड के जोजो कुड़मा में प्राकृति, पंरपरा और पशु सम्मान के प्रतीक तीन दिवसीय सोहराय पर्व बरदखूंटा कार्यक्रम के साथ संर्पन्न हो गई। कार्तिक अमावस्या से लेकर तीसरे दिन अलग-अलग तरीकों से इस पर्व को मनाया गया। यह पर्व में अमावस्या के दिन पशु धन को तेल लगाकर, दूसरे दिन गोहाल पूजा एवं तीसरे दिन बरदखूंटा मनाया गया। सोहराय पर्व केवल उत्सव नहीं, बल्कि धरती, पशु और मानव के मधुर संबंधों का प्रतीक है। यह पर्व बताता है कि किसान और उसके मवेशी, दोनों ही जीवन और आजीविका के अभिन्न अंग हैं। इसका उद्देश्य झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित करना, स्थानीय कलाकारों को मंच प्रदान करना तथा युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ना है।

वक्ताओं ने कहा कि सोहराय परब झारखंड की मिट्टी, संस्कृति और परंपरा का अभिन्न अंग है। यह प्रकृति, पशुपालन, कृषि जीवन और सामुदायिक एकता का उत्सव है। सोहराय पेंटिंग, पारंपरिक गीत-संगीत, नृत्य, और लोकनाट्य इसके जीवंत स्वरूप हैं। इस दौरान सभी गांव के किसान भाई अपने बैलों को सजाकर कर गांव के चौराहों पर खूंटे पर बांधा। जहां ढोल नगाड़ों के साथ एवं पारंपरिक लोक गीतों के साथ बैलों के साथ खेलाया गया। वही बैल काफी मस्त होकर खेलने वाले के साथ अपने सींगों से मारने का कोशिश करता रहा जो काफी रोमांचक नजारा था। बरदखूंटा कार्यक्रम में प्रथम व द्वितीय पुरस्कार बहादुर महाली को 5 हज़ार और 3 हजार तथा तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले गुरा मांझी को 2 हजार की नगद राशि देकर पुरस्कृत किया गया। इसके अवाले बरदखूंटा कार्यक्रम वाले 10 बैल मालिकों को सांत्वना पुरस्कार दिया गया। इस दौरान मुख्य रूप से खरसावां विधायक प्रतिनिधि अर्जुन गोप, सुकरा महतो, महिपाल महतो, चौतन महतो, शशांक शेखर सिंहदेव, जितमोहन महतो, सुभाष सिंहदेव, निकेश सिंहदेव, पंकज महतो, पीतम महतो, मोहनलाल महतो, दशरथ महतो, मुरारी महतो, दशरथ महतो, ललित महतो, समेत कई गांवों से आए दर्शक और ग्रामीण उपस्थित थे।
