शिक्षा मंत्री जी देख लीजिए! कंधे पर बैग और
हाथों में चप्पल…, कीचड से सनी सडकों पर खरसावां माॅडल स्कूल जाने को मजबूर शिक्षक-शिक्षिकाए व छात्र-छात्राए
kharsawan खरसावां प्रखंड अंतर्गत बुरूडीह में संचालित अंग्रजी माध्यम का एकमात्र सरकारी माॅडल स्कूल खरसावां का सडक का हाल बेलाह है। थोडी सी बारिश में ही सडकें कीचडमय से सन जाती हैं। इन्हीं कीचड भरे रास्ते से होकर प्रतिदिन खरसावां प्रखंड के विभिन्न गांव के छात्र-छात्राए स्कूल जाते हैं। वे अपने हाथों में चप्पल और स्कूल बैग को पीठ पर लादकर सडक पार करते हैं। परिजन शिक्षा मंत्री और सरकार से सवाल पूछ रहे हैं। खरसावां के बुरूडीह स्कूल के शिक्षक-शिक्षिकाए, छात्र-छात्राए और अभिभावक किचडमय सड़क से परेशान हैं। यहां पर हालत यह है कि ग्रामीणों के साथ-साथ स्कूली बच्चे भी कीचड़ भरे रास्ते से स्कूल जाने को मजबूर हैं। यह रास्ता झारखंड के विकास की पोल खोल रहा है। बारिश के दिनों में तो इस बुरूडीह का रास्ता कीचड़ में बदल जाता है। जिससें खरसावां माॅडल स्कूल में पठन पाठन करने वाले लगभग तीन सौ छात्र-छात्राए किचडमय रास्ते से त्राही त्राहीमय है। साथ ही साथ शिक्षा विभाग, जिला प्रशासन और झारखंड सरकार को कोसते नजर आते है। इस मामले पर प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी नवल किशोर सिंह कृछ कहने को तैयार नही है।

अभिभावकों ने उपायुक्त को सौप चुके ज्ञापन
खरसावां मॉडल स्कूल के 400 से अधिक छात्र-छात्राएं शिक्षकों की कमी और अन्य सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं। अभिभावकों ने इस संबंध में पहले भी जिला उपायुक्त को ज्ञापन भी सौंपा है,। जिसमें विषयवार शिक्षकों की नियुक्ति, बुरूडीह से स्कूल तक सड़क का निर्माण स्कूल में रनिंग वाटर, बिजली, पंखे, और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था और अन्य सुविधाओं की मांग की गई है।

विद्यालय तो बना लेकिन नहीं बना सडक
आज जहां एक ओर देश के बच्चे शिक्षा पाकर चांद और मंगल ग्रह पर पहुंच रहे हैं। वहीं आजादी के इतने वर्षों बाद भी लाखों भारतीय बच्चों को मूलभूत शिक्षा पाने के लिए प्राथमिक विद्यालय पहुंचने में भी परेशानियों का सामना करना पड रहा है। सरकारी बाबूओं की लापरवाही के कारण सडक विहीन विद्यालय में खेतो के बीच कीचडमय सडक पर गिरते-पडते स्कूली छात्र पढाई को पहुंचते हैं। कई बार तो किचयमड पर चलने के दौरान शिक्षक भी गिर जाते हैं। इतना ही नहीं कई बार विद्यालय की जांच को जाने वाले पदाधिकारी भी किचयमय से गिर चुके हैं।

फिसलन रास्ते में बने बडे बडे गड्ढे
स्कूल जाने वाला यह रास्ता लगभग आधा किलोमीटर से भी ज्यादा लंबा है। लाल व पीली मिट्टी होने के कारण यहां पर फिसलन अधिक हो जाती है। रास्ते में बडे बडे गड्ढे हैं। जिनमें पानी भर जाता है. आए दिन छात्र-छात्राएं इन गड्ढों में गिरकर चोटिल हो जाते हैं। ग्रामीणों की यह समस्या आज की नहीं है। पिछले कई सालों से इस परेशानी से ग्रामीण परेशान हैं। सालों से रहवासी इसकी शिकायत संबंधित अधिकारियों से कर रहे हैं. इसके बावजूद आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई। जिससें स्कूल छात्र-छात्राए नरकीय जीवन जीने को मजबूर है। स्कूल के बच्चे कंधो पर स्कूली बैग और हाथ में जूते-चप्पल लेकर रोज करीब लगभग आधा किलोमीटर से अधिक कीचड़ से भरे रास्ते को पार करते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यहां सड़क बनवाने के लिए शासन-प्रशासन से कई बार शिकायत किया जा चुका है। सांसद, विधायक, उपायुक्त, बीईईओ, बीडीओ भी कई बार इस बात की शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती है।
